Bharat Express DD Free Dish

दांडी मार्च की सालगिरह: गृह मंत्री अमित शाह ने साबरमती के महानायकों को किया याद

दांडी मार्च की वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह ने महात्मा गांधी और सत्याग्रहियों को दी श्रद्धांजलि. जानिए कैसे 12 मार्च 1930 को शुरू हुई इस यात्रा ने ‘स्वदेशी’ और ‘आत्मनिर्भरता’ की नींव रखी.

Amit Shah Tweet on Dandi March Anniversary

आज 12 मार्च है, भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिन जब साबरमती आश्रम से शुरू हुए कुछ कदमों ने गुलामी की बेड़ियों को कमजोर करना शुरू कर दिया था. साल 1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ दांडी यात्रा का आगाज किया था. नमक पर लगाए गए अन्यायपूर्ण टैक्स के खिलाफ शुरू हुआ यह सत्याग्रह देखते ही देखते एक जन-आंदोलन बन गया. इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दांडी मार्च के सेनानियों को नमन करते हुए इस आंदोलन की अहमियत को रेखांकित किया है.

स्वतंत्रता की इच्छा को बनाया प्रबल

गृह मंत्री अमित शाह एक्स पर बापू और दांडी के वीरों को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, ‘1930 ई. में आज ही के दिन महात्मा गांधी जी ने दांडी सत्याग्रह शुरू किया था, जिसने हर आयु, वर्ग के भीतर स्वतंत्रता की इच्छा को और भी प्रबल बनाया.

अमित शाह ने आगे लिखा कि ये स्वदेशी की दिशा में उठाया गया ऐसा कदम था, जिसने स्वाधीनता आंदोलन की दिशा बदल दी. दांडी सत्याग्रह के सभी महापुरुषों को नमन करता हूं.”

एक चुटकी नमक और स्वदेशी का संकल्प

दांडी यात्रा महज 24 दिनों की पदयात्रा नहीं थी, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत और ‘स्वदेशी’ की दिशा में उठाया गया पहला सबसे मजबूत कदम था. गांधी जी ने समुद्र किनारे नमक हाथ में लेकर अंग्रेजों के उस कानून को चुनौती दी थी, जो भारतीयों को उनके अपने ही प्राकृतिक संसाधनों से वंचित करता था.

साथ ही आज का ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान भी कहीं न कहीं उसी दांडी सत्याग्रह की भावनाओं से प्रेरित है. उस दौर में इस यात्रा ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर भारतीय के दिल में आजादी की अलख जगा दी थी.

दांडी मार्च की प्रासंगिकता

12 मार्च 1930 को साबरमती से शुरू हुई यह 385 किलोमीटर की यात्रा 6 अप्रैल को दांडी में समाप्त हुई थी. आज जब भारत अपनी आजादी के 100 साल (2047) के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब दांडी सत्याग्रह के मूल्य और भी प्रासंगिक हो जाते हैं.

सत्याग्रह का अर्थ ही है ‘सत्य के लिए आग्रह’. आज के समय में अनुशासन, एकता और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना ही उन महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

ये भी पढें: लॉकर भी नहीं हैं सेफ! फरीदाबाद में बड़ा बैंक घोटाला, SBI मैनेजर ने किया कांड

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read