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क्या वाकई इंदिरा गांधी ने 1967 में गोल्ड पर लगाई थी रोक? वायरल क्लिप का काला सच आया सामने

सोशल मीडिया पर अखबार की एक फर्जी क्लिपिंग वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि 1967 में इंदिरा गांधी ने सोना न खरीदने की अपील की थी. ये वायरल दावा पूरी तरह गलत है और इसे प्रधानमंत्री मोदी की हालिया अपील के काउंटर के तौर पर फैलाया जा रहा है.

Fact Check Did Indira Gandhi ask Indians not to buy gold in 1967 Truth behind viral newspaper clip

आजकल सोशल मीडिया पर सोने को लेकर राजनीति गरमा गई है. दरअसल, एक पुरानी अखबार की कटिंग व्हाट्सएप और एक्स (X) पर आग की तरह फैल रही है. दावा किया जा रहा है कि 1967 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी जनता से सोना न खरीदने की अपील की थी. लेकिन क्या ये वाकई में सच है आइए जानते है सच्चाई.

कहां से शुरू हुआ ये ‘गोल्डन’ विवाद?

मामला तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) पर दबाव कम करने के लिए नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने का सुझाव दिया. बस फिर क्या था, विपक्ष ने इसे आड़े हाथों लिया. राहुल गांधी ने इसे सरकार की विफलता बताया.

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जवाब में, सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों और कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने एक कथित क्लिपिंग वायरल कर दी. इसमें तारीख लिखी है 6 जून 1967 और हेडलाइन दी गई है कि इंदिरा गांधी ने लोगों से ‘राष्ट्रीय अनुशासन’ के लिए सोना न खरीदने को कहा है. तर्क ये दिया गया कि मोदी जी जो कह रहे हैं, वो कांग्रेस के जमाने में भी हो चुका है.

मीडिया हाउस भी खा गए गच्चा

हैरानी की बात ये है कि इस तथाकथित ‘वायरल क्लिप’ के झांसे में सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े पत्रकार भी आ गए. हालांकि, सच्चाई पता चलते ही उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया. साथ ही भाजपा सांसद ने भी इससे राहुल गांधी को घेरने के लिए शेयर किया.

क्या है सच?

जब इस वायरल क्लिपिंग की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि यह पूरी तरह से फर्जी (Fake) है. 6 जून 1967 के अखबार के असली फ्रंट पेज पर ऐसी कोई खबर मौजूद ही नहीं है. तकनीक के दौर में किसी भी पुराने अखबार की हेडलाइन बदलना अब बाएं हाथ का खेल है, और इस मामले में भी यही ‘डिजिटल हेराफेरी’ की गई है.

आजकल जानकारी के नाम पर प्रोपेगैंडा परोसना बहुत आसान हो गया है. खासकर जब बात देश की अर्थव्यवस्था या सोने जैसी निवेश वाली चीजों की हो, तो लोग जल्दी भावुक हो जाते हैं. एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमें ऐसी किसी भी ‘पुरानी खबर’ पर तब तक भरोसा नहीं करना चाहिए, जब तक उसे किसी भरोसेमंद सोर्स से क्रॉस-चेक न कर लिया जाए. इस जांच से ये साफ है कि वायरल हो रही तस्वीर भ्रामक और झूठा है जिसे एआई से बनाया गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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