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धार भोजशाला पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पूरे परिसर को माना मां सरस्वती का मंदिर, हिंदू पक्ष को मिला पूर्ण पूजा का अधिकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार के चर्चित भोजशाला विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूरे परिसर को मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर घोषित किया है. अदालत ने ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में मिले सनातन प्रतीकों को आधार मानते हुए हिंदू पक्ष के हक में फैसला दिया.

Dhar Bhojshala Row MP High Court Rules Complex is Vagdevi Temple Based on ASI Report

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Dhar Bhojshala) विवाद पर इंदौर हाई कोर्ट ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूरे परिसर को मूल रूप से मंदिर माना है. लगभग चार साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट के नियमित सुनवाई के आदेश के बाद आए इस फैसले को लेकर पूरे देश की नजरें टिकी हुई थीं. 12 मई को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे आज सार्वजनिक किया गया.

कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट के माननीय जज ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘हम उन सभी वकीलों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने इस जटिल मामले में कोर्ट की सहायता की. हमने सभी ऐतिहासिक तथ्यों और एएसआई (ASI) एक्ट का बारीकी से अध्ययन किया है. आर्कियोलॉजी (पुरातत्व) एक विज्ञान है और इसके वैज्ञानिक निष्कर्षों पर पूरी तरह भरोसा किया जा सकता है. इसके साथ ही, हमें संविधान के तहत नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों का भी सम्मान करना है.’ कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 11वीं सदी का यह परिसर परमार वंश के राजा भोज के काल में संस्कृत शिक्षा का एक बड़ा केंद्र और देवी सरस्वती का पवित्र मंदिर था.

क्या है पूरा विवाद?

धार भोजशाला के इस कानूनी विवाद की नई शुरुआत साल 2022 में हुई, जब रंजना अग्निहोत्री और उनके सहयोगियों ने ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की तरफ से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इस याचिका में मांग की गई थी कि भोजशाला का वास्तविक धार्मिक स्वरूप तय किया जाए और हिंदू समुदाय को वहां बिना किसी बंदिश के पूर्ण रूप से पूजा करने का हक मिले. इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को एएसआई (ASI) को पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी.

इसके बाद एएसआई की टीम ने 22 मार्च 2024 से लगातार 98 दिनों तक अत्याधुनिक तकनीकों से परिसर को खंगाला और 15 जुलाई 2024 को 2000 से भी ज्यादा पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की.

अप्रैल में शुरू हुई नियमित सुनवाई

सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद, इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इसी साल 6 अप्रैल 2026 से मामले की नियमित सुनवाई शुरू की. 12 मई 2026 तक चली इस मैराथन सुनवाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम और जैन, तीनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलों के साथ दावों और सबूतों का अंबार लगा दिया. एक महीने से अधिक समय तक चली इस कानूनी बहस में अदालत के सामने हजारों ऐतिहासिक दस्तावेज, पुराने रिकॉर्ड, पुरातात्विक साक्ष्य और धार्मिक ग्रंथ रखे गए.

सभी पक्षों की दलीलें पूरी तरह सुनने और समझने के बाद कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो अब ऐतिहासिक निर्णय के रूप में सामने आया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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