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बच्चों के लिए खेल बनेगा मौलिक अधिकार? सुप्रीम कोर्ट 22 सितंबर को करेगा बड़ी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट खेल और शारीरिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने की मांग वाली याचिका पर 22 सितंबर को सुनवाई करेगा. जानें याचिका में क्या मांग की गई है.

Supreme Court News
Edited by Sahil Singh

सुप्रीम कोर्ट खेल और शारीरिक शिक्षा को मौलिक अधिकार के दायरे में लाने की मांग वाली याचिका पर 22 सितंबर को सुनवाई करेगा. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है.

कोर्ट ने कहा- मांग सराहनीय और जरूरी

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह एक सराहनीय और बेहद जरूरी मांग है. उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में बच्चे खेल-कूद से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में स्कूलों में खेल और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देना जरूरी है.

स्कूलों में खेल शिक्षा अनिवार्य करने की मांग

याचिका में मांग की गई है कि खेल और फिजिकल लिटरेसी यानी शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाए. इसके साथ ही देशभर के स्कूलों में खेल शिक्षा को अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि बच्चों को नर्सरी से लेकर परास्नातक स्तर तक पढ़ाई के साथ खेल और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए.

2018 में दाखिल हुई थी याचिका

यह याचिका खेल शोधकर्ता कनिष्क पांडे ने साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी. इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा था.

एमिकस क्यूरी ने खेल विशेषज्ञों से ली राय

मामले में कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी ने बताया कि उन्होंने खेल जगत के तीन दिग्गजों से इस मुद्दे पर सलाह ली है. इनमें पूर्व टेनिस चैंपियन सोमदत्त, पूर्व बैडमिंटन चैंपियन पी. गोपीनाथ और हॉकी के दिग्गज रसकीन्हा शामिल हैं.


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एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया कि केवल ‘स्पोर्ट्स’ शब्द के बजाय ‘फिजिकल लिटरेसी’ को ज्यादा व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाना चाहिए और इसे मौलिक अधिकार की तरह संरक्षण मिलना चाहिए. सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि चार अर्जुन पुरस्कार विजेताओं ने इस मामले में शामिल होने की इच्छा जताई है. अब सुप्रीम कोर्ट 22 सितंबर को इस याचिका पर आगे सुनवाई करेगा.

-भारत एक्सप्रेस 



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