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CBSE द्वारा कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए तीन भाषा नीति को अचानक लागू करने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, बोर्ड से मांगी रिपोर्ट

CBSE की 9वीं-10वीं में तीन भाषा नीति अचानक लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त. कोर्ट ने कहा- 6ठीं क्लास से अगले साल लागू हो यह नियम. जानिए पूरा मामला.

Supreme Court Questions CBSE Three Language Policy Implementation
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई द्वारा कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए तीन भाषा नीति को अचानक लागू करने पर सवाल उठाया है. कोर्ट ने एक बार फिर कहा छठवीं क्लास के बच्चों के लिए तीसरी भाषा अगले साल से लागू किया जाना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

मामले में सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि वे इस सुझाव पर विचार करेंगे. मामले की सुनवाई के दौरान एएसजी भाटी ने कोर्ट को बताया कि इस पूरे मामले और तीन भाषा नीति से जुड़ी व्यवहारिक समस्याओं पर विचार करने के लिए समिति का गठन किया गया है.

व्यवस्था संबंधित मुद्दे पर रिपोर्ट देने का निर्देश

पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा था कि क्या स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या है? कोर्ट ने व्यवस्था संबंधित मुद्दे पर रिपोर्ट देने को कहा था. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि अचानक इन भाषाओं को सीखकर 10वीं की परीक्षा कैसे दे सकते हैं? इससे अव्यवस्था फैल जाएगी. यह याचिका छात्रों, पैरेंट्स और टीचर्स की ओर से दायर की गई है.

सीबीएससी ने कक्षा 9 और 10 के छात्रो के लिए सीबीआई ने यह बड़ा बदलाव करते हुए सर्कुलर जारी किया है. जारी अधिसूचना के मुताबिक अब छात्रों को तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होगी. सीबीएसई की ओर से जारी यह अधिसूचना 1 जुलाई से लागू होगा. सीबीएसई की नई सर्कुलर ने छात्रों, अभिभावकों और कई स्कूलों के बीच हलचल पैदा कर दिया है. स्कूल असमंजस में है कि इसे कैसे लागू किया जाए.

क्या है नई व्यवस्था का उद्देश्य?

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विद्यार्थी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुना जा सकता है, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों. अन्यथा विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ना होगा. यह व्यवस्था 2026-2027 से लागू होगी. हिंदी, तमिल, मराठी,बंगाली, गुजराती, कन्नड़, पंजाबी, संस्कृत सहित कई भाषाओं को शामिल किया गया है.

सीबीएसई के अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों में मातृभाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति गतिविधि मजबूत करना है. सीबीएसई ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए तीन भाषाओं का पढ़ना अनिवार्य कर दिया है. लेकिन तीसरी भाषा (आर 3) के पेपर को बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं किया गया है. तीसरी भाषा का असेसमेंट सिर्फ स्कूल लेवल तक सीमित रहेगा.

किन दिक्कतों का करना पड़ रहा सामना?

हालांकि तीसरी भाषा के इंटरनल मार्क्स या ग्रेड सीबीएसई 10वीं की फाइनल मार्कसीट में शामिल किए जाएंगे. सीबीएसई ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 31 मई 2026 तक सभी अपनी तीसरी भाषा तय कर लें.

कई स्कूलों ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी, लेकिन कुछ संस्थानों को भाषा चयन और शिक्षक व्यवस्था जैसी संस्थानों को भाषा चयन और शिक्षक व्यवस्था जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बोर्ड लगातार स्कूलों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर मदद भी उपलब्ध करा रहा है. ताकि नई व्यवस्था समय पर लागू हो सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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