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निजाम की जिद, रजाकारों का अत्याचार और भारत में विलय: पढ़ें हैदराबाद के एकीकरण की पूरी दास्तान

आजादी के समय हैदराबाद को भारत में मिलने से रोकने वाले रजाकार कौन थे? जानिए कासिम रजवी के आतंक, निजाम की भूमिका और भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन पोलो’ की पूरी कहानी.

History of Razakars in Hyderabad and Operation Polo 1948 Explained

कौन थे Razakars? (AI IMAGE)

Edited by Vaibhav Gupta

Who Are Razakars: रजाकार हैदराबाद रियासत (ब्रिटिश भारत) की मुस्लिम राजनीतिक पार्टी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (MIM) का एक अर्धसैनिक संगठन था. इसकी स्थापना 1938 में MIM के नेता बहादुर यार जंग ने की थी. विभाजन के समय कासिम रजवी के नेतृत्व में यह संगठन काफी शक्तिशाली हो गया था.

रजाकारों का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम निजाम के शासन को बनाए रखना और हैदराबाद रियासत का भारत में विलय रोकना था.

मीर उस्मान अली खान ने किया स्टैंडस्टिल समझौता

1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के बाद लगभग सभी रियासतों ने भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का फैसला कर लिया. लेकिन हैदराबाद इसका अपवाद था. मुस्लिम शासक मीर उस्मान अली खान (निजाम) ने स्वतंत्र रहने का फैसला किया. उन्होंने रजाकारों की मदद से अपनी सत्ता बनाए रखने की कोशिश की और 29 नवंबर 1947 को भारत के साथ स्टैंडस्टिल समझौता भी किया.

हालांकि, रियासत की बहुसंख्यक हिंदू आबादी भारत में विलय चाहती थी.

रजाकारों की गतिविधियां और अत्याचार

  • रजाकारों ने कम्युनिस्ट समर्थकों और तेलंगाना विद्रोह में शामिल किसानों के खिलाफ निर्मम कार्रवाई की.
  • उन्होंने भारत में विलय के समर्थक मुस्लिम कार्यकर्ताओं (जैसे पत्रकार शुएबुल्लाह खान) को भी निशाना बनाया.
  • हिंदू आबादी और उनके समर्थकों पर आतंक फैलाया गया. सामूहिक हत्याएं, बलात्कार और लूटपाट की घटनाएं हुईं. कई लोग जंगलों, सुनसान किलों या पड़ोसी भारतीय प्रांतों में भागने को मजबूर हुए.
  • हैदराबाद स्टेट कांग्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उसके नेताओं को बॉम्बे व मद्रास प्रेसीडेंसी की ओर भागना पड़ा.

कासिम रजवी (अलीगढ़ विश्वविद्यालय से शिक्षित) का दावा था कि हैदराबाद एक मुस्लिम राज्य है और मुस्लिम वर्चस्व विजय के अधिकार पर आधारित है. रजाकारों ने निजाम से विशेष शक्तियां मांगी और उनका दुरुपयोग शुरू कर दिया. निजाम को उनके आदेशों का पालन करना पड़ता था.

ऑपरेशन पोलो और अंत

भारत सरकार के लिए रजाकारों को भंग न करने का निजाम का इनकार ऑपरेशन पोलो (1948) का एक प्रमुख कारण बना. भारतीय सेना के खिलाफ रजाकार मुख्य प्रतिरोधक शक्ति थे. उनकी हार के बाद निजाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और रजाकारों को भंग करने पर सहमत हो गए.

कासिम रजवी को पहले जेल भेजा गया, बाद में उन्हें पाकिस्तान जाने की अनुमति मिली, जहां उन्हें शरण मिली.

रजाकार संगठन निजाम की सत्ता बनाए रखने और हिंदू बहुसंख्यक आबादी की आकांक्षाओं को दबाने के लिए बनाया गया था. उनकी गतिविधियां मानवाधिकार उल्लंघन और अत्याचारों से भरी रहीं. अंततः भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद यह संगठन समाप्त हो गया और हैदराबाद भारत का हिस्सा बन गया.

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-भारत एक्सप्रेस



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