विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
Galileo Telescope: 25 अगस्त 1609 को गैलीलियो ने पेश की दूरबीन, जिसने ब्रह्मांड को देखने का नजरिया बदल दिया
25 अगस्त 1609 को गैलीलियो गैलीली ने वेनिस की सीनेट के सामने अपना टेलिस्कोप पेश किया, जिसने खगोलीय अध्ययन की दिशा बदल दी. दूरबीन से चंद्रमा के पहाड़, बृहस्पति के चार चंद्रमा और शुक्र के चरणों की खोज ने सूर्यकेंद्रित सिद्धांत को मजबूत आधार दिया.
आदी फोम ने बाजार में उतारा गद्दा ब्रांड ‘स्लीपली’, 36 सालों के अनुभव के साथ स्लीप सेगमेंट में दी दस्तक
आदी फोम ने 36 वर्षों के अनुभव के साथ अपना नया गद्दा ब्रांड 'स्लीपली' लॉन्च किया है. इसमें शरीर को सही सपोर्ट देने के लिए खास S5 एडैप्टिव जोन्स तकनीक दी गई है.
एक पन्ने से बदली दुनिया! जानिए क्यों खास है ‘इंटरनॉट डे’ और कैसे हुई थी इंटरनेट की शुरुआत?
आज इंटरनेट पर इतनी वेबसाइटें हैं कि उनकी गिनती करना लगभग असंभव है. लेकिन तीन दशक पहले स्थिति बिल्कुल अलग थी. इंटरनेट के इतिहास में 23 अगस्त का दिन बेहद खास है.
जानिए कौन थीं वो महिला वैज्ञानिक, जिन्होंने बदल दी देश के मौसम विज्ञान की तकदीर
भारत की ‘वेदर वुमन’ अन्ना मणि ने मौसम विज्ञान को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई. मौसम उपकरणों के स्वदेशी निर्माण से लेकर सौर विकिरण, पवन ऊर्जा और ओजोन परत के अध्ययन तक, उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है.
24 अगस्त 1608 : जब ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला जहाज पहुंचा भारत
24 अगस्त 1608 को ईस्ट इंडिया कंपनी का जहाज ‘हेक्टर’ सूरत पहुंचा, जिसे भारत में कंपनी के औपचारिक आगमन की शुरुआत माना जाता है.
सवर्णों के बिना असंभ जाति व्यवस्था का अंत: पढ़िए सुरज येनगड़े की किताब ‘Caste Matters’ का सार
आरक्षण हटाओ आंदोलन के दौर में डॉ. सुरज मिलिंद येनगड़े की किताब 'जाति जिंदा है' भारतीय समाज के जातीय विमर्श और सवर्ण विशेषाधिकारों पर एक जरूरी बहस छेड़ती है.
विदेश की धरती पर जब गूंजा ‘वंदे मातरम’, जानिए कौन थीं मैडम भीकाजी कामा और क्यों खास है 22 अगस्त?
मैडम भीकाजी कामा ने 22 अगस्त 1907 को जर्मनी के स्टटगार्ट में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन के दौरान भारतीय झंडा फहराकर दुनिया के सामने भारत की आजादी की आवाज बुलंद की.
जिस कहानी पर चला था मुकदमा… जानिए कौन थीं बेबाक लेखिका इस्मत चुगताई?
इस्मत चुगताई ने अपने बेबाक लेखन से उर्दू साहित्य में महिलाओं की आवाज को नई पहचान दी। उन्होंने समाज के उन सच को सामने रखा, जिन पर बात करने से लोग अक्सर बचते थे.
कारोबार या सही फैसला? बदलाव के दौर से गुजर रहे टाटा समूह के सामने क्या हैं असली इम्तिहान
टाटा समूह आज नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर एक अहम दौर से गुजर रहा है. ऐसे समय में हरीश भट की किताब “डूइंग द राइट थिंग: लर्निंग्स फ्रॉम रतन टाटा” रतन टाटा की नेतृत्व शैली और उनके मूल्यों को समझने का एक महत्वपूर्ण नजरिया देती है.
एक फोन कॉल और 3 बड़ी चूकें… जानिए क्यों आज भी सिहरा देती है 1995 की वह रात?
20 अगस्त 1995 की रात फिरोजाबाद में एक नीलगाय से टकराने के बाद कालिंदी एक्सप्रेस ट्रैक पर रुक गई. कुछ ही देर बाद गलत सूचना के चलते उसी ट्रैक पर तेज रफ्तार पुरुषोत्तम एक्सप्रेस को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई.





