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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


राष्ट्रऋषि राजनारायण बसु भारतीय राष्ट्रवाद, शिक्षा और सांस्कृतिक जागरण के प्रमुख विचारकों में गिने जाते हैं.

उन्होंने पंचायत और वार्ड चुनाव से लेकर विधानसभा, लोकसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद तक करीब 280 से 284 चुनाव लड़े. चुनावों की इस लंबी सूची में जीत से ज्यादा उनकी पहचान लगातार चुनाव लड़ने के जुनून से बनी. हालांकि उनके चुनावी रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़े थोड़े अलग मिलते हैं और कहीं-कहीं स्थानीय चुनाव में जीत का भी उल्लेख है, लेकिन आम तौर पर उनकी कहानी लगातार चुनाव हारने के बावजूद मैदान में डटे रहने वाले उम्मीदवार की रही.

Tathastu ICS: शिक्षक दिवस के अवसर पर, तथास्तु आईसीएस ने गुरुसंवाद 2026 का आयोजन किया, यह एक विशिष्ट समारोह था जो युवा मन को गढ़ने और राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने वाले शिक्षकों और मार्गदर्शकों को सम्मानित करने हेतु समर्पित था.

1965 India Pakistan War: पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' की शुरुआत की. हजारों पाकिस्तानी लड़ाकों को गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग दी गई. हथियारों से लैस ये लड़ाके 5 अगस्त 1965 को कश्मीर में घुसे. उनका पहनावा और रहन-सहन बिल्कुल कश्मीरियों जैसा था, ताकि वे आसानी से घुल-मिल सकें. लेकिन कश्मीर के लोगों ने इन्हें पहचान लिया.

केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान और माननीय न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी (पूर्व न्यायाधीश, भारत का सर्वोच्च न्यायालय) ने युवा भारत को साहस, चरित्र और दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

5 सितंबर 1972 को म्यूनिख ओलंपिक में फिलिस्तीनी आतंकियों ने 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी. इसके जवाब में इजरायल की मोसाद ने 'ऑपरेशन रेथ ऑफ गॉड' चलाकर बदला लिया.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव को 164 देशों के समर्थन से मंजूरी दी है. प्रस्ताव मर्केटर प्रोजेक्शन की लंबे समय से चली आ रही विकृतियों पर सवाल उठाता है और Equal Earth प्रोजेक्शन के इस्तेमाल की सिफारिश करता है.

5 सितंबर 1986 को कराची में पैन एम फ्लाइट 73 के अपहरण के दौरान 22 वर्षीय नीरजा भनोट ने अदम्य साहस दिखाते हुए सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई.

Indian Education Service: शिक्षक दिवस पर सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में संस्थागत सुधार की जरूरत है. जानिए क्यों कोठारी आयोग की 'भारतीय शिक्षा सेवा' (IES) की सिफारिश आज भी प्रासंगिक है.

बिहार के राघवेंद्र कुमार ने अपने दोस्त की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद हेलमेट जागरूकता को अपनी जिंदगी का मिशन बना लिया.