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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


भारत में आज 'आत्मनिर्भरता' और 'लोकल के लिए वोकल' जैसे नारे खूब सुनाई देते हैं. लेकिन क्या सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक आज़ादी ही काफी है? क्या हमारी सोच, हमारा ज्ञान और दुनिया को देखने का तरीका भी पूरी तरह आज़ाद हो पाया है? इसी बड़े और असहज सवाल को सामने लाती है अभय कुमार दुबे की नई किताब ‘उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य’.

दिल्ली में रविवार (24 मई, 2026) को 'जनजातीय सांस्कृतिक समागम' का भव्य आयोजन होने जा रहा है, जो भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में किया जा रहा है.

भारतीय विज्ञान और सेवा की परंपरा में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है, जब डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन और उनकी पुत्री डॉ. सौम्या स्वामीनाथन को रॉयल सोसाइटी से जुड़ने का गौरव प्राप्त हुआ.

Vani Prakashan Books 2026: शंभुनाथ की नई किताब 'छायावाद का देश' (2026) आज के बढ़ते उपभोक्तावाद और पर्यावरण संकट के बीच महादेवी, निराला, प्रसाद और पंत के मानवीय विचारों की एक बेहद जरूरी और नई खोज है.

21 मई 1994 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, जब मात्र 19 वर्ष की उम्र में सुष्मिता सेन ने मिस यूनिवर्स का ताज जीतकर देश का नाम रोशन किया.

दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में 18वें हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल 2026 के तहत आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मशहूर दास्तानगो और रंगकर्मी महमूद फ़ारूक़ी की किताब ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ का लोकार्पण किया गया.

गुरु दत्त का नाम हिंदी सिनेमा में सिर्फ एक निर्देशक या अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि उस कलाकार के रूप में लिया जाता है जिसने अपने समय की पीड़ा, अकेलेपन और टूटते रिश्तों को पर्दे पर बेहद खूबसूरती से उतारा है.

Discovery of India: 20 मई की तारीख इतिहास के दो ऐसे महान नाविकों की याद दिलाती है जिनका मकसद था भारत की खोज. जहां वास्को डी गामा ने कालीकट पहुंचकर सीधा समुद्री मार्ग खोजा, वहीं कोलंबस भारत की तलाश में अमेरिका जा पहुंचे. यह लेख उनकी साहसिक यात्राओं और उनके वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है.

अमेरिकी जांच वेबसाइट ड्रॉप साइट न्यूज (Drop Site News) द्वारा जारी एक लीक राजनयिक केबल ने पाकिस्तान की 2022 की राजनीतिक हलचल को फिर से सुर्खियों में ला दिया है.

देहरादून से आई यह खबर पूरे उत्तराखंड और देश के लिए शोक का विषय बन गई है. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के वरिष्ठ पूर्व अधिकारी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का 91 वर्ष की आयु में देहरादून में निधन हो गया.