विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
कलम की ताकत ने बंदूकों को किया शांत, गया के ‘मगध सुपर 30’ ने कैसे बदली नक्सल प्रभावित इलाके की तकदीर
खान सर और कोचिंग संस्थाओं को लेकर जारी बहस के बीच, बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अभयानंद की आत्मकथा 'असीम' का यह अंश 'सुपर-30' की शुरुआत की एक अलग कहानी सामने लाता है. इसमें अभयानंद बताते हैं कि किस तरह आनंद कुमार के साथ मिलकर उन्होंने आर्थिक रूप से वंचित लेकिन मेधावी छात्रों के लिए इस पहल की नींव रखी थी. आज जब कोचिंग संस्थानों की भूमिका और उनके सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं, तब 'सुपर-30' की इस शुरुआती यात्रा को उसके सह-संस्थापक की नज़र से पढ़ना दिलचस्प भी है और प्रासंगिक भी.
संडे का फंडा: सिर्फ आराम का दिन नहीं, बल्कि शोषित मजदूरों की जीत का प्रतीक है रविवार, जानें कैसे बना छुट्टी का दिन
मजदूर नेता नारायण मेघाजी लोखंडे के 7 साल के कड़े आंदोलन के बाद, आखिरकार 10 जून 1890 के प्रस्ताव को मानते हुए अंग्रेजी हुकूमत को झुकना पड़ा और रविवार को आधिकारिक तौर पर देश का पहला साप्ताहिक अवकाश घोषित किया गया.
अंग्रेजों का वो खौफनाक धोखा, जिसने 25 साल के ‘भगवान’ को दे दिया धीमा जहर; पढ़ें बिरसा मुंडा के शौर्य की कहानी
Birsa Munda's Death Anniversary: जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला देने वाले महान क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा की आज पुण्यतिथि है. 9 जून 1900 को रांची की जेल में मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने अंतिम सांस ली थी, लेकिन उनका 'उलगुलान' आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा है.
World Ocean Day 2026: 95% व्यापार, दुनिया में दूसरा नंबर…जानिए भारत के लिए क्यों खास है ‘ब्लू इकोनॉमी’
8 जून को मनाया जाने वाला विश्व महासागर दिवस हमें यह याद दिलाता है कि महासागर केवल पानी का विशाल विस्तार नहीं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं.
स्थानीय हवा नहीं, ग्लोबल सिस्टम का हिस्सा है भारतीय मॉनसून; जानें सर गिल्बर्ट वॉकर की ऐतिहासिक खोज की पूरी कहानी
1920 के दशक में आईएमडी के प्रमुख सर गिल्बर्ट वॉकर द्वारा की गई 'दक्षिणी आक्सिलेशन' (Southern Oscillation) की खोज ने भारतीय मॉनसून के पूर्वानुमान को हमेशा के लिए बदल दिया. इस खोज ने साबित किया कि मॉनसून कोई स्थानीय घटना नहीं बल्कि एक वैश्विक प्रणाली है.
सियासी दुश्मनी का वो अनसुना किस्सा! डॉ. सुभाष कश्यप के निधन के बाद सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही ये कहानी?
Indian Politics History: संविधान के 'चलते-फिरते विश्वकोश' डॉ. सुभाष कश्यप का निधन हो गया है. 37 वर्षों तक संसद को अपनी सेवाएं देने वाले इस विद्वान के जीवन में एक ऐसी राजनीतिक 'गांठ' भी थी, जिसने उनका राज्यसभा जाने का सपना हमेशा के लिए अधूरा रख दिया.
विदेशी धरती से आजादी की अलख जगाने वाले महानायक; क्या मिटाई जा रही है मौलाना बरकतुल्ला की पहचान?
भोपाल स्थित मौलाना बरकतुल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव ने एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है.
सत्ता नहीं, बदलाव चाहिए था… जानिए क्यों के. अन्नामलाई ने बीजेपी से तोड़ा नाता?
अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ने का मुख्य कारण बताया कि वे पार्टी की तमिलनाडु रणनीति से अब सहमत नहीं हैं. अपने इस्तीफे के बयान में अन्नामलाई ने कहा कि वे छह साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर भाजपा में शामिल हुए थे.
जल बिना कैसा होगा कल? ‘बहे सो गंगा’ में पत्रकार मंजीत ठाकुर ने दी उत्तर भारत को बड़ी चेतावनी
Bahe So Ganga Book Review: मंजीत ठाकुर की पुस्तक ‘बहे सो गंगा’ उत्तर भारत में बढ़ते जल संकट और नदियों के क्षरण पर केंद्रित है. पुस्तक गंगा, यमुना समेत कई नदियों की बिगड़ती स्थिति, प्रदूषण और अतिक्रमण के खतरों को उजागर करती है.
‘प्रख्यात गल्पकार’: वामपंथी-नेहरूवादी इतिहास-लेखन के कथित पूर्वाग्रहों और आधा सच की तीखी पड़ताल
वरिष्ठ पत्रकार उत्पल कुमार की नई पुस्तक 'प्रख्यात गल्पकार' (Eminent Distorians) ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक भारत तक के वामपंथी-नेहरूवादी इतिहास-लेखन में किए गए कथित बदलावों और चयनात्मक तथ्यों की तीखी समीक्षा करती है







