विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
8 अप्रैल 1974: जब पटना की सड़कों पर उतरी थी ‘मौन क्रांति’: जेपी की जीवनी में कैद है लोकतंत्र की आजादी की गाथा
8 अप्रैल 1974 का दिन भारतीय राजनीति में अहिंसक संकल्प का प्रतीक है. सुप्रसिद्ध इतिहासकार बिमल प्रसाद और सुजाता प्रसाद की पुस्तक 'क्रांति का सपना' (वाणी प्रकाशन) जेपी के उस मौन जुलूस की याद दिलाती है.
ऐतिहासिक क्षण: डॉ. मेनका गुरुस्वामी बनीं भारत की पहली LGBTQ+ सांसद
आज का दिन भारत की राजनीति में एक मील का पत्थर साबित होने वाला बन गया. सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने राज्यसभा में शपथ लेकर भारत की पहली खुलकर LGBTQ+ समुदाय से जुड़ी संसद सदस्य बनकर इतिहास रचा है.
गर्मी अब सिर्फ मौसम नहीं, बड़ी आफत! अब दिल्ली से संचालित होगा साउथ एशिया हब; 90% आबादी को बचाने का मास्टर प्लान तैयार
दक्षिण एशिया में बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की समस्या नहीं है. स्वास्थ्य, रोज़गार और बुनियादी ढांचे पर इसका असर तेजी से बढ़ रहा है. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क का साउथ एशिया हब नई दिल्ली में शुरू किया गया है.
समय के स्वामी महाकाल: उज्जैन को वैश्विक समय मानक बनाने के पीछे क्या है तर्क, धर्मेंद्र प्रधान के प्रस्ताव का पूरा विश्लेषण
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 'महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम' सम्मेलन में GMT की जगह MST (Mahakal Standard Time) का प्रस्ताव रखकर एक नई वैश्विक बहस छेड़ दी है.
द्रविड़ राजनीति की गहराई समझाती ‘पेरियार से जयललिता तक’
अभी देश की नजरें तमिलनाडु पर टिकी हैं. विधानसभा चुनाव में डीएमके-एआईएडीएमके की द्रविड़ पार्टियां फिर से अपनी पहचान, भाषा और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर मोर्चा संभाले हुए हैं, जबकि नई ताकतें जैसे अभिनेता विजय की टीवीके और भाजपा की कोशिशें द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक गढ़ को चुनौती दे रही हैं.
आरा के स्कूल से दिल्ली के सिंहासन तक; बाबू जगजीवन राम की वो कहानी, जिसने बदली देश की तकदीर
बाबू जगजीवन राम, दलित समाज के प्रेरणास्रोत और स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी का आज जन्मदिन हैं. भारत के रक्षा मंत्री, कृषि मंत्री और उप-प्रधानमंत्री रह चुके बाबू जगजीवन राम ने हरित क्रांति, 1971 के युद्ध और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है.
विवेक अग्निहोत्री की ‘रक्तबोध’ ने हिलाया बंगाल का इतिहास; विभाजन के खूनी पन्नों की दास्तां, जिन्हें किताबों से मिटा दिया गया
क्या बंगाल का इतिहास केवल 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' तक सीमित है? विवेक रंजन अग्निहोत्री की नई किताब 'रक्तबोध' उन कड़वे सत्यों को सामने लाती है, जिन्हें दशकों तक सेक्युलर राजनीति और औपनिवेशिक इतिहासकारों ने दबाए रखा.
त्रिवेणी कला संगम के 75 वर्ष: एक जिद्दी नृत्यांगना का सपना, जिन्होंने हार मानना नहीं सीखा
75 वर्ष की यात्रा: दिल्ली के मंडी हाउस में त्रिवेणी कला संगम 75 साल पूरे कर चुका है. एक जिद्दी नृत्यांगना सुंदरी श्रीधरानी का ₹10,000 से शुरू हुआ सपना आज भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र बन गया. यहां नृत्य, संगीत और चित्रकला का संगम है.
क्या जिज्ञासा की कमी बनी भारतीय सभ्यता के पतन की वजह? यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार की पुस्तक में छिपे हैं इतिहास के 5 बड़े सबक
Indian Civilization - The Zenith & Decline: आईआईटी दिल्ली के स्नातक और यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार की नई पुस्तक भारतीय सभ्यता के स्वर्णिम काल से लेकर उसके संघर्षों तक का एक निष्पक्ष विश्लेषण पेश करती है.
गैरेज से शुरू हुआ ‘एप्पल’ का सफर, 50 सालों में कैसे बनी दुनिया की सबसे कीमती कंपनी?
1 अप्रैल 1976 को स्टीव जॉब्स और स्टीव वोज्नियाक ने अपने गैरेज में एप्पल कंप्यूटर कंपनी की नींव रखी. आज, 2026 में, एप्पल अपने 50वें वर्ष (Apple@50) मना रही है.







