विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
‘यह जो बिहार है’ और ‘हमर चंपारण’- बिहार की आत्मा और इतिहास के गहन चिंतन को उकेरती अरविंद मोहन की पुस्तकें
बिहार को समझना दरअसल भारत की उस आत्मा को समझना है, जो तर्क करती है, सवाल पूछती है और हर स्थापित सत्य को चुनौती देती है. यहां ‘मैं’ का स्थान ‘हम’ ने ले लिया है. यह सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि एक सोच है.
बिहार दिवस पर विशेष: बिहार की बौद्धिक विरासत का जीवंत दस्तावेज है ‘नालंदा’
आज बिहार अपना स्थापना दिवस मना रहा है. इस अवसर पर पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित अभय के. की पुस्तक "नालंदा: विश्व चेतना का उद्गम स्थल" के जरिए जानिए उस महान विश्वविद्यालय के उत्थान, पतन और फिर से जीवित होने की पूरी कहानी.
21 मार्च 1977: भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत और एक काले अध्याय का अंत
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 21 मार्च 1977 एक ऐसी तारीख है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. यह वही दिन था जब देश ने 21 महीनों तक चले आपातकाल के अंधेरे से बाहर निकलकर फिर से आज़ादी की सांस ली.
विश्व वन दिवस पर कबीर संजय की ‘जंगलमन की डायरी’, प्रकृति के साथ एक जीवंत संवाद
जंगलमन की डायरी एक संवेदनशील डायरी-शैली की कृति है, जिसमें कबीर संजय प्रकृति, बचपन की यादों, जंगलों और मानव-प्रकृति संबंधों के टूटते रिश्ते को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करते हैं. यह पुस्तक पर्यावरण चेतना, डिजिटल डिटॉक्स और वन संरक्षण का गहरा संदेश देती है.
‘पंख दिए आकाश न दोगे’; महाकवि कन्हैयालाल सेठिया की कविताओं में छिपी है आत्मनिर्भरता की गूंज | Book Review
आज विश्व कविता दिवस पर याद करते हैं राजस्थान के उस जनकवि को, जिनकी पंक्तियों में रेगिस्तान की तपन भी है और संवेदना की ठंडी छांव भी. पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित कन्हैयालाल सेठिया के प्रतिनिधि संग्रह 'पंख दिए आकाश न दोगे' की विशेष समीक्षा, जो हमें स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान सिखाती है.
जब गौरैया को खत्म कर अकाल की चपेट में आ गया था चीन; जानिए क्यों खास है यह ‘नन्ही सिपाही’
घरेलू गौरैया, जिसे पास्सर डोमेस्टिकस (House Sparrow) कहा जाता है, हमारे घरों और बस्तियों में सदियों से इंसानों की साथी रही है. कभी घर के आंगन में फुदकती और छोटे कीड़े-मकोड़े खाकर जीवनयापन करने वाली यह चिड़िया अब कम दिखाई देती है.
न रंग, न गंध… पल भर में फेफड़े जाम! नाज़ियों के उस घातक केमिकल की कहानी जिसने जापान को दहला दिया
20 मार्च 1995 को टोक्यो की मेट्रो में ओम शिनरिक्यो कल्ट के सदस्यों ने सरिन गैस का हमला किया, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई और हजारों यात्रियों की जिंदगी बदल गई. यह हमला जापान के इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है और आज भी केमिकल आतंकवाद की चेतावनी देता है.
अब कानों में गूंजेंगे रामायण और महाभारत के सूत्र; ब्लूम्सबरी इंडिया ने लॉन्च की ऑडियोबुक्स की बड़ी रेंज
ब्लूम्सबरी इंडिया ने अंग्रेज़ी और हिंदी में ऑडियोबुक्स की बड़ी श्रृंखला लॉन्च की है, जिसमें अमी गनात्रा की ‘रामायण अनरावेल्ड’ और ‘महाभारत अनरावेल्ड’ सहित कई चर्चित लेखकों की किताबें शामिल हैं. ये ऑडियोबुक्स अब प्रमुख वैश्विक प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं.
क्या सुरक्षा केवल कानून है? अंशु हर्ष की ‘इच्छा मृत्यु’ ने उठाया सवाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बीच गूंजी बेजुबान आवाज़ें
अंशु हर्ष की पुस्तक ‘इच्छा मृत्यु: पैसिव यूथेनेशिया’ सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की पृष्ठभूमि में गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार, नैतिक सवालों और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से सामने लाती है.
रामावतार त्यागी जन्मशताब्दी: ‘तन समर्पित, मन समर्पित’ के रचयिता, सरल शब्दों में फूंकी राष्ट्रभक्ति की अलख
आज 17 मार्च 2026 को राष्ट्रकवि रामावतार त्यागी की 100वीं जयंती है. 'समर्पण' जैसी कालजयी कविता देने वाले त्यागी जी ने पत्रकारिता और बॉलीवुड में भी अपनी छाप छोड़ी. पढ़ें उनकी जीवन यात्रा.







