विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
बांग्लादेश में 35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री: तारिक रहमान का ऐतिहासिक उदय
बांग्लादेश की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रचंड जीत के बाद तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. यह 35 साल में पहली बार है जब किसी पुरुष नेता ने इस पद की कमान संभाली है.
रात 8 बजे के बुलेटिन की वो शान… नहीं रहीं दूरदर्शन की दिग्गज एंकर सरला माहेश्वरी
आज दूरदर्शन की प्रतिष्ठित और लोकप्रिय न्यूज एंकर सरला माहेश्वरी ने 71 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली.
जमनालाल बजाज पुण्यतिथि: गांधीजी के ‘पांचवें पुत्र’ ने कैसे जोड़ा उद्योग, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार?
महान उद्योगपति जमनालाल बजाज ने व्यापार को गांधीवादी ट्रस्टीशिप से जोड़कर राष्ट्रसेवा का नया मॉडल दिया. अस्पृश्यता उन्मूलन, खादी और स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान आज भी प्रेरणा देता है.
नैनन में आन-बान: स्वरों की आलापचारी में डूबती एक आत्मीय यात्रा
यतीन्द्र मिश्र की नई पुस्तक 'नैनन में आन-बान' शास्त्रीय संगीत की शुष्क व्याख्या नहीं, बल्कि सुरों की एक आत्मीय यात्रा है. यह किताब 12 महान संगीतकारों के जीवन और उनकी गायकी के जरिए पाठक को रागों की दुनिया से जोड़ती है.
एक हिंसक घटना जिसने गांधी के अहिंसा आंदोलन रोकने पर मजबूर कर दिया
चौरी चौरा कांड की 104वीं वर्षगांठ पर यह घटना फिर याद दिलाती है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा और जनाक्रोश के बीच संतुलन कितना जटिल था. 1922 की इस घटना ने ना सिर्फ असहयोग आंदोलन को रोका, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा और बहस को हमेशा के लिए बदल दिया.
मसालों के लिए महायुद्ध: दीव की लहरों पर पुर्तगालियों ने बदला इतिहास, 500 साल पहले ऐसे पड़ा था गुलामी का बीज
क्या आप जानते हैं कि भारत में यूरोपीय गुलामी की नींव एक 'मसाला युद्ध' से पड़ी थी? 3 फरवरी 1509 को दीव के तट पर लड़ी गई वह नौसैनिक जंग, जहाँ काली मिर्च और लौंग के व्यापार पर कब्जे के लिए दुनिया की महाशक्तियां आपस में भिड़ गई थीं.
बिहार की मिट्टी से जुड़ा पद्मश्री सम्मान, डॉ. गोपालजी त्रिवेदी बने मिसाल
बिहार के मुजफ्फरपुर से निकलकर कृषि विज्ञान में क्रांति लाने वाले डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को 2026 के पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. लीची की खेती के पुनर्जीवन से लेकर मखाना की वैज्ञानिक पैदावार तक, उनके नवाचारों ने लाखों किसानों की किस्मत बदली और बिहार की कृषि को वैश्विक पहचान दिलाई.
जीवन रक्षक से सुरक्षा प्रहरी तक: भारतीय तटरक्षक के 50 गौरवशाली वर्ष
भारतीय तटरक्षक बल अपने स्थापना दिवस पर स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है. 1976 में सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह बल आज समुद्री सुरक्षा, जीवन रक्षा अभियानों और राष्ट्र की समुद्री सीमाओं की रक्षा में एक मजबूत स्तंभ बन चुका है. पांच दशकों में आईसीजी ने साहस, सेवा और आधुनिकता की नई मिसाल कायम की है.
केरल का ऐतिहासिक कदम : देश में पहली बार वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित बजट पेश
केरल ने देश में पहली बार वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से Elderly Budget पेश कर इतिहास रच दिया है. 2026-27 के बजट में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए Silver Economy और Care Economy को विकास की धुरी बनाया गया है.
चीन की ‘डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी’ और अफ्रीका में बंदरगाहों पर बढ़ता प्रभाव
अफ्रीका में चीन की बढ़ती बंदरगाह मौजूदगी ने ‘डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी’ की बहस तेज कर दी है. निवेश, कर्ज और रणनीतिक नियंत्रण के बीच संप्रभुता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.







