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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


आज देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी की जयंती है. 19वीं सदी के रूढ़िवादी समाज की बेड़ियां तोड़कर अमेरिका से मेडिकल डिग्री लेने वाली आनंदीबाई की कहानी आंसू और साहस की मिसाल है.

आज भारतीय सिनेमा की नींव रखने वाली महान अभिनेत्री देविका रानी की 118वीं जयंती है. लंदन में पढ़ाई, 'बॉम्बे टॉकीज' की स्थापना और पर्दे पर सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने वाली देविका रानी का सफर बेहद साहसी रहा.

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् ने श्रीधर पराड़कर की पुस्तक 'साहित्य का धर्म' पर गोष्ठी आयोजित की. पवनपुत्र बादल ने कहा कि यह पुस्तक साहित्य जगत को बदलने और भारतीयता से भरने के लिए प्रेरित करती है.

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘रश्मिरथी’ हिंदी साहित्य का एक कालजयी खंडकाव्य है, जो महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन, संघर्ष, दान, वीरता और अंतिम बलिदान पर केंद्रित है.

27 मार्च को दुनिया भर में विश्व रंगमंच दिवस मनाया जा रहा है. इस मौके पर राजकमल प्रकाशन से आई फैसल अलकाजी की किताब 'मंच प्रवेश' चर्चा के केंद्र में है.

1947 में भारत की आज़ादी के समय, ईरान के कुछ अखबारों और ज़ोरोएस्ट्रियन नेताओं ने एक विचार रखा कि भारत में बसे पारसी समुदाय को उनकी ‘पितृभूमि’ ईरान वापस बुलाया जाए.

अन्ना मणि, जिन्हें 'भारत की वेदर वुमन' कहा जाता है, मौसम विज्ञान और ओजोन अध्ययन में अग्रणी थीं. उन्होंने भारत में मौसम उपकरणों का विकास किया और ओजोनसोंडे जैसे उपकरण तैयार किए.

अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की 95वीं बरसी पर पंकज चतुर्वेदी की नई किताब ‘मेरे भगत सिंह’ चर्चा में है. यह किताब भगत सिंह को केवल एक क्रांतिकारी नायक के रूप में नहीं, बल्कि लाहौर के उस घर के एक लाडले बेटे और जेल की कोठरी में गहन दर्शन पर बहस करने वाले एक प्रखर विद्वान के रूप में पेश करती है.

बिहार में पानी कभी सिर्फ जीवन का स्रोत नहीं रहा, वह एक विरोधाभास है जहां एक ही समय में बाढ़ और सुखाड़ दोनों मौजूद रहते हैं. यह प्रकृति का दोष नहीं, बल्कि हमारी नीतियों और समझ की सीमाओं का परिणाम है.

बिहार को समझना दरअसल भारत की उस आत्मा को समझना है, जो तर्क करती है, सवाल पूछती है और हर स्थापित सत्य को चुनौती देती है. यहां ‘मैं’ का स्थान ‘हम’ ने ले लिया है. यह सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि एक सोच है.