विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
संविधान दिवस : भारतीय संविधान के निर्माण में बी. एन. राव की अमिट भूमिका
हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस मनाया जाता है. यह दिन भारतीय संविधान को अपनाए जाने की याद में समर्पित है. संविधान के निर्माण में बेनेगल नरसिंग राव (बी. एन. राव) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी, जिन्हें "संविधान का वास्तुकार" कहा जाता है.
श्री सत्य साईं बाबा की जन्म शताब्दी : एक अवतार के सौ वर्ष
सत्य साईं बाबा की जन्म शताब्दी पर उनकी शिक्षाओं, सेवा कार्यों और विवादों पर चर्चा. उन्होंने आध्यात्मिकता को मानव-सेवा का पर्याय बनाया और शिक्षा, स्वास्थ्य व जल योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ पहुंचाया.
‘बहादुर 120’ ने फिर जीवित किया रेजांगला की अमर गाथा को
फरहान अख्तर की फिल्म ‘120 बहादुर’ ने 18 नवंबर 1962 की रेजांगला लड़ाई के अभूतपूर्व साहस को फिर जीवंत कर दिया है. मेजर शैतान सिंह और 13 कुमाऊं रेजिमेंट की 120 जवानों वाली कंपनी ने 4,000 चीनी सैनिकों का डटकर मुकाबला कर इतिहास रचा. यह कथा आज भी भारतीय सेना की शौर्य-परंपरा का सबसे उज्ज्वल अध्याय है.
समाजवादी विचारधारा के प्रखर योद्धा सच्चिदानंद सिन्हा का निधन: एक युग का अवसान
भारतीय समाजवादी परंपरा के प्रमुख स्तंभ और प्रखर चिंतक सच्चिदानंद सिन्हा का 96 वर्ष की आयु में मुजफ्फरपुर में निधन हो गया.
खामोश इतिहास: 3 हजार आदिवासी हुए थे शहीद, जानें 112 साल पुराना मानगढ़ का सच
मानगढ़ धाम का अध्याय भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे दर्दनाक सत्य है. 17 नवंबर 1913 को ब्रिटिश हुकूमत और देसी रियासतों ने भील आदिवासियों पर जो गोलियों की बारिश की, वह जलियांवाला बाग से भी कई गुना बड़ा नरसंहार था.
पूर्वांचल के पहले किसान नेता थे गेंदा सिंह
बाबू गेंदा सिंह महान विचारक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, किसानों के हितैषी होने के साथ एक सच्चे लोकसेवक थे. उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन अपने लिए नहीं बल्कि दूसरे लोगों की भलाई में समर्पित कर दिया.
जवाहरलाल नेहरू हाज़िर हों: अदालत में नेहरूजी का साहस और स्वतंत्रता की गूंज
पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन पर विशेष- पंकज चतुर्वेदी की पुस्तक जवाहरलाल नेहरू हाज़िर हों नेहरू के कारावास काल और अदालतों में उनके न्याय संघर्ष को जीवंत करती है.
बेगमपुल से दरियागंज: देसी पल्प की दिलचस्प दास्तान
खक- संपादक यशवंत व्यास की हालिया किताब "बेगमपुल से दरियागंज" हिंदी साहित्य की उस अनदेखी, लेकिन जीवंत दुनिया का एक ऐसा दस्तावेज है जो 'पल्प' या लुगदी साहित्य के शौकीनों के लिए किसी खजाने से कम नहीं.
वंदे मातरम के 150 वर्ष: स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणा मंत्र
'वंदे मातरम' की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में अपने उपन्यास आनंदमठ के लिए की थी. यह गीत संस्कृत और बांग्ला का मिश्रण है, जो भारतमाता की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि का गुणगान करता है.
कोकिला शारदा सिन्हा ने बिहार की कला-संस्कृति को लोकगीतों के माध्यम से दी एक नई पहचान
आज बिहार की मिट्टी से निकली उस मधुर आवाज को विदा हुए एक साल हो गया, जो कभी थमती नहीं लगती थी. 'बिहार कोकिला' के नाम से मशहूर पद्म विभूषण शारदा सिन्हा की पहली पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है.





