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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


हिमालय की बर्फीली चोटियों में दबी यह कहानी सिर्फ एक जासूसी मिशन की नहीं, बल्कि शीत युद्ध की उस खामोश लड़ाई की है, जिसमें भारत और अमेरिका ने चीन की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं पर नजर रखने के लिए मिलकर गुप्त ऑपरेशन चलाया.

श्रीलंका का रेडियो सिलोन (अब SLBC) अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा है. 16 दिसंबर 1925 को कोलंबो से प्रसारण शुरू करने वाला यह एशिया का सबसे पुराना रेडियो स्टेशन, दशकों तक दक्षिण एशिया के घरों में संगीत और एकता की लहरें फैलाता रहा.

विभाजन के बाद पाकिस्तान ने इन द्वीपों पर दावा ठोकने के लिए एक जहाज भेजा था. लेकिन भारत के 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता और त्वरित कार्रवाई ने इन द्वीपों को भारत का अभिन्न अंग बना दिया.

भारतीय सिनेमा की अमर कृति ‘शोले’ ने अपने 50वें जन्मदिन पर दर्शकों के दिलों में फिर से जगह बनाई है. रमेश सिप्पी के निर्देशन और सलीम-जावेद की पटकथा वाली यह फिल्म आज भी बॉलीवुड की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर मानी जाती है.

संगीता अग्रवाल की नवीनतम पुस्तक दूरदर्शन: आधी आबादी की सशक्त गाथा (वाणी प्रकाशन, 2025) न केवल भारत के लोक प्रसारक माध्यमों के इतिहास को उजागर करती है, बल्कि उन अदृश्य नायिकाओं की अनकही कहानियों को भी सामने लाती है.

नंबी नारायण, इसरो के पूर्व वैज्ञानिक, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के उन स्तंभों में से हैं जिनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ न्याय की लड़ाई भी इतिहास बन गई. 1994 के इसरो जासूसी कांड में झूठे आरोपों, यातनाओं और वर्षों की कानूनी लड़ाई के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी.

वाराणसी की बेटी विंग कमांडर शिवांगी सिंह ने एक बार फिर इतिहास रचा है. देश की पहली और अभी तक एकमात्र महिला रफाल पायलट अब भारतीय वायुसेना के भावी फाइटर पायलटों को तैयार करने वाली ट्रेनर बन गई हैं.

सुपरस्टार रजनीकांत आज 75 साल के हो गए. साधारण परिवार से उठकर उन्होंने 50 साल में 170 से ज्यादा फिल्में की और अपनी अनोखी स्टाइल व लोकप्रियता से सिनेमा में एक नई पहचान बनाई.

मंजुल पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित पृथ्वी का संक्षिप्त इतिहास ( A Brief History of Earth ) लेखक एंड्र्यू एच. नॉल की एक उत्कृष्ट कृति है. यह पुस्तक पृथ्वी के 4.6 अरब वर्षों के भूगर्भीय इतिहास को आठ संक्षिप्त अध्यायों में समेटती है,

होमी व्यारावाला भारत की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट थीं, जिनके कैमरे ने गांधी जी के आंदोलनों से लेकर 15 अगस्त 1947 के ऐतिहासिक क्षणों तक को अमर बनाया. पुरुष-प्रधान मीडिया जगत में उन्होंने अपनी मेहनत, तकनीक और साहस से ऐसी तस्वीरें उतारीं जो आज भी भारत के इतिहास की पहचान हैं. 2011 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.