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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


भारत में 'पेड पीरियड लीव' (PPL) को लेकर बहस अब निर्णायक मोड़ पर है. इस आंदोलन की अगुवाई रंजीता प्रियदर्शिनी कर रही हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत अनुभव से प्रेरित होकर पूरे देश में महिलाओं के अधिकार के लिए अभियान शुरू किया.

तिब्बत विद्रोह दिवस: 1959 के ल्हासा विद्रोह की याद, जहां तिब्बतियों ने चीनी अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई. 'तिब्बत में सात वर्ष' पुस्तक तिब्बत के स्वर्णिम अतीत की गवाही देती है.

साल 1953 का 'ऑपरेशन अजाक्स' ईरान के इतिहास का सबसे निर्णायक मोड़ था, जिसने लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़कर शाह का शासन फिर से स्थापित किया था. यह घटना सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं थी, बल्कि इसी ने आज के अमेरिका-ईरान तनाव और 1979 की क्रांति की नींव रखी थी.

राजकमल प्रकाशन के 81वें स्थापना दिवस पर आयोजित ‘सहयात्रा उत्सव’ में साहित्य और समाज से जुड़े मुद्दों पर गंभीर संवाद हुआ.

अमर चित्र कथा और टिंकल जैसी कालजयी रचनाओं के जनक अनंत पई, जिन्हें स्नेह से अंकल पई कहा जाता है. उन्होनें भारतीय बच्चों को अपनी संस्कृति, इतिहास और पौराणिक कथाओं से जोड़ने का अद्भुत कार्य किया.

18 फरवरी 1946, बंबई के समुद्री किनारों से उठी एक चिंगारी ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी. Royal Indian Navy के भारतीय नाविकों ने HMIS Talwar से विद्रोह की शुरुआत की, जो देखते ही देखते देशव्यापी आंदोलन में बदल गया. 80 साल बाद भी 1946 का यह नौसैनिक विद्रोह भारत की स्वतंत्रता की अंतिम निर्णायक दस्तक के रूप में याद किया जाता है.

वासुदेव बलवंत फड़के (4 नवंबर 1845 – 17 फरवरी 1883) भारत के प्रथम क्रांतिकारी और सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम के जनक माने जाते हैं.

“दण्डपाणि च भैरवम्” यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी और प्रो. (डॉ.) विजय नाथ मिश्र द्वारा संकलित एक अद्भुत कृति है, जो काशी (वाराणसी) की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संपदा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है.

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव का 'स्पंदन' और क्वांटम फिजिक्स के 'वाइब्रेशन' में क्या संबंध है? डॉ. मृत्युंजय गुहा मजूमदार की नई पुस्तक 'शिव से श्रोडिंगर' प्राचीन कश्मीरी शैव दर्शन और आधुनिक विज्ञान के रहस्यों को एक साथ लाती है.

बांग्लादेश की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रचंड जीत के बाद तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. यह 35 साल में पहली बार है जब किसी पुरुष नेता ने इस पद की कमान संभाली है.