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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह की पुस्तक 'जेपी से बीजेपी' बिहार की राजनीति की एक व्यापक और जीवंत कैनवास है, जो समाजवाद के हरे रंग से भगवा की उभार तक की यात्रा को बखूबी उकेरती है.

कोलकाता के सुकेश लेन की गली नंबर 12 उस दिन पूरे शहर का केंद्र बन गई थी. हर सड़क मानो उसी घर की ओर जा रही थी, जहां प्रेसीडेंसी कॉलेज के प्रोफेसर राजकृष्ण बंद्योपाध्याय का घर था.

पटना की गलियों में बड़े हुए अभय कुमार सिंह ने शायद कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह रूस के कुर्स्क क्षेत्रीय विधानसभा में बैठेंगे. कोरस्क में उन्होंने फार्मास्यूटिकल से लेकर रियल एस्टेट तक कारोबार खड़ा किया और बाद में यूनाइटेड रूस पार्टी से राजनीति में आए.

आज जब हम 5 दिसंबर की तारीख देखते हैं, मन अपने आप उस महान ऋषि की ओर उठता है जिन्होंने भारत की स्वाधीनता-साधना को भी उतनी ही गहराई से जिया जितनी गहराई से उन्होंने मानव-चेतना के अन्तर्जगत को खोजा.

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति और वरिष्ठ वकील स्वराज कौशल का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया. मिजोरम के सबसे युवा राज्यपाल और मिजोरम शांति समझौते में उनकी अहम भूमिका के लिए उन्हें याद किया जाएगा.

राजकमल प्रकाशन समूह ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘हिन्दी उपन्यास का स्त्री वर्ष: भेंट, पाठ, चर्चा’ का आयोजन किया. कार्यक्रम में नौ समकालीन स्त्री उपन्यासकारों की कृतियों का चयनित अंशों के माध्यम से पाठ और परिचय प्रस्तुत किया गया.

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की प्राचीन परम्पराएं आज भी पूर्ण रूप से जीवंत हैं. वाराणसी (काशी) के बाल-वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने इसे सिद्ध कर दिखाया है.

उस दौर में जब HIV का नाम सुनते ही लोग मुंह फेर लेते थे, जब संक्रमित व्यक्ति को समाज, परिवार और यहां तक कि अस्पताल भी ठुकरा देते थे, तब एक महिला बिना हिचक उनके पास जाती थी.

राजकमल प्रकाशन समूह हिन्दी उपन्यास का स्त्री-वर्ष मना रहा है. 3 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय राजधानी के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हिन्दी की नौ प्रमुख स्त्री-कथाकारों के उपन्यास एकसाथ लोकार्पित किए जाएंगे.

Book Review Why the Poor Don't Kill Us: The Psychology of Indians मनु जोसेफ की पुस्तक 'व्हाय द पूअर डोन्ट किल अस: द साइकोलॉजी ऑफ इंडियंस,' भारतीय समाज की एक ऐसी सच्चाई को उजागर करती है जो असहज करने वाली है.