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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


आज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) अपने 100 वर्ष पूरे कर रही है. 26 दिसंबर, 1925 को कानपुर में स्थापित यह पार्टी मजदूरों, किसानों और वंचितों की आवाज बनकर उभरी.

गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादे अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह भारतीय इतिहास में अद्वितीय वीरता और बलिदान के प्रतीक हैं. 26 दिसंबर को मनाया जाने वाला वीर बाल दिवस उनकी शहादत को नमन करने और आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.

19वीं सदी की भारत में बाल विवाह जैसी प्रथा के खिलाफ रुक्माबाई राउत ने अदालती जंग लड़ी और महिलाओं के अधिकारों की राह खोली. उन्होंने अपने जीवन को संघर्ष, शिक्षा और चिकित्सा सेवा में समर्पित किया.

प्रख्यात कवि, उपन्यासकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे शुक्ल हिंदी साहित्य में सादगी और दार्शनिक गहराई का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करते थे.

हिंद पॉकेट बुक्स से प्रकाशित यह 242 पृष्ठों की पुस्तक, रामानुजन के जीवन को एक रोचक उपन्यास की तरह बुनती है, जिसमें गणित के सूत्रों की जादुई चमक के साथ-साथ सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत संघर्षों की कड़वाहट भी घुली हुई है.

20 दिसंबर 1978 की शाम, जब दिल्ली की हलचल धीमी पड़ रही थी, इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-410 लखनऊ से उड़ान भर रही थी. लेकिन अचानक दो ‘अहिंसक गांधीवादी’ युवकों ने विमान को हाईजैक कर लिया.

भारत उस वक्त ब्रिटेन का उपनिवेश था, और ब्रिटिश साम्राज्य इस उपमहाद्वीप की भूमि को अपने युद्ध प्रयासों के लिए खुलकर इस्तेमाल कर रहा था. इसी का नतीजा था कि कोलकाता, जो तब कलकत्ता के नाम से जाना जाता था, जापानी इंपीरियल आर्मी एयरफोर्स के निशाने पर आ गया.

19 दिसंबर का दिन गोवा में 451 वर्षों के पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन की समाप्ति का प्रतीक है. जिसे गोवा मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है. 1961 में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा गोवा, दमन और दीव को मुक्त कराने वाले सफल अभियान 'ऑपरेशन विजय' की सफलता को यह दिवस समर्पित है.

भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले महान मूर्तिकार राम सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित उनकी कृतियां भारतीय इतिहास और एकता का जीवंत प्रतीक हैं.

1887 में बिहार के सारण जिले के में एक साधारण नाई परिवार में जन्मे इस महान लोक कलाकार ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि उनके जीवन की सादगी और संघर्ष भोजपुरी को वैश्विक पटल पर चमकाएंगे.