प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार अपनी स्पीच में FDI यानी फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट के फुलफॉर्म को बदलते हुए कहा था कि एफडीआई का मतलब हमें ‘फर्स्ट डेवलप इंडिया’ के तौर पर समझना होगा. पिछले दस सालों में भारत में हुआ निवेश इसको चरितार्थ करता है. साल 2015 के मुकाबले 2025 तक देश में निवेश का इकोसिस्टम पूरी तरह बदल गया है.
सितंबर 2015 से लेकर सितंबर 2025 तक, पिछले एक दशक में भारत का इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम बदल गया है. स्टार्टअप फाउंडर्स, प्रोफेशनल्स, नए दौर के निवेशक और तेजी से बढ़ते टियर-I और III शहरों की भागीदारी से इस बदलाव को बढ़ावा मिला.
पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज़ (PMS) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFS) के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) पर नज़र डालें तो सितंबर 2015 में यह आंकड़ां 1.54 लाख करोड़ था, जो कि सितंबर 2025 तक 31.2 प्रतिशत CAGR की दर से बढ़कर 23.43 लाख करोड़ पहुंच गया है.
10 सालों में 748.78 अरब डॉलर का आया निवेश
इसके अलावा पिछले दस सालों में, भारत ने 66,37,734 करोड़ रुपये (748.78 अरब डॉलर) का FDI आकर्षित किया है, जो बढ़ते इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस और देश की बढ़ती इकॉनमिक गहराई को दिखाता है. लगभग 40 करोड़ लोगों का एक फलता-फूलता मिडिल क्लास, बढ़ती इनकम और बढ़ती रूरल डिमांड सभी सेक्टर्स में कंजम्प्शन को बढ़ा रही है.
भारत अब धीरे-धीरे सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी में से एक बन गया है, जो दुनिया भर के इन्वेस्टर्स के लिए एक वाइब्रेंट और वेलकमिंग माहौल देता है. वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में में GDP में 8.2% की बढ़ोतरी के साथ देश ग्लोबल ग्रोथ में आगे बना हुआ है, जिसे मज़बूत घरेलू कंजम्प्शन, युवा और स्किल्ड वर्कफोर्स और लगातार पॉलिसी रिफॉर्म्स से पावर मिली है.
स्टार्टअप्स की संख्या 10 सालों में 350 से 1.95 लाख पहुंची
वहीं 2015 में भारत में 350 सरकारी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे, जो अक्टूबर 2025 तक लगभग 1.95 लाख हो गई. यह बड़ी बढ़ोतरी भारत के दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में विकास को दिखाती है, जिसमें बड़े शहरों और छोटे टियर 2 और टियर 3 शहरों में कई नए वेंचर उभर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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