PHDCCI National Workshop: पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने पीएचडी हाउस, नई दिल्ली में “विकसित भारत @2047 के लिए PACS-आधारित स्मार्ट सहकारी संस्थाओं का निर्माण” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में देशभर से नीति-निर्माता, सहकारी क्षेत्र के नेता और प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए.
कार्यशाला का उद्देश्य PACS को मजबूत बनाना और उन्हें भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में विकसित करना था.
इस अवसर पर एपीडा के सचिव डॉ. सुधांशु, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (NFCSF) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे, PHDCCI की सहकारिता समिति के अध्यक्ष दिलीपभाई संघानी, PHDCCI के सीईओ एवं महासचिव डॉ. रंजीत मेहता और उप महासचिव डॉ. जतिंदर सिंह सहित कई वरिष्ठ सहकारी नेता मौजूद रहे.

सहकार से समृद्धि तक
PHDCCI की सहकारिता समिति के अध्यक्ष दिलीपभाई संघानी ने प्रधानमंत्री के “सहकार से समृद्धि” के विज़न का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना से सहकारी क्षेत्र को एक नई दिशा मिली है. उनके अनुसार PACS और अन्य सहकारी संस्थाएं ग्रामीण और कृषि विकास में बहुत अहम भूमिका निभाती हैं. उन्होंने ज़ोर दिया कि PACS को अब केवल ऋण देने वाली संस्था नहीं, बल्कि डिजिटल, पारदर्शी और बहुउद्देश्यीय संस्थान बनना होगा, जो किसानों को भंडारण, विपणन, मूल्य संवर्धन और बाज़ार से जोड़ने का काम करें.
विकसित भारत है सपना
एपीडा के सचिव डॉ. सुधांशु ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना PACS को सशक्त किए बिना पूरा नहीं हो सकता. उन्होंने बताया कि भारत का सहकारी मॉडल दुनिया भर में पहचाना जाता है. PACS को तकनीक से जोड़ना और उन्हें बहु-कार्यात्मक बनाना समय की ज़रूरत है. उन्होंने APEDA की उन पहलों का ज़िक्र किया, जिनके ज़रिये FPO, सहकारी संस्थाएं और कृषि स्टार्टअप्स को तकनीकी और निर्यात से जुड़ी मदद दी जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत के करीब आधे कृषि निर्यात APEDA से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से होते हैं.

ग्रामीण बिजनेस का केंद्र बन रही PACS
NFCSF के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने कहा कि PACS किसानों की समृद्धि का आधार हैं. उन्होंने बताया कि आज PACS धीरे-धीरे ग्रामीण बिज़नेस केंद्र बन रही हैं. इससे किसानों को सस्ता ऋण मिलता है, साहूकारों पर निर्भरता कम होती है और ग्रामीण सप्लाई चेन मजबूत होती है. उन्होंने सहकारी चीनी मिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि सही समन्वय से किसानों की आय और PACS की आर्थिक स्थिति दोनों बेहतर हुई हैं.
PHDCCI के सीईओ एवं महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने सभी अतिथियों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि PHDCCI अपने 121 वर्षों की विरासत के साथ देश के विकास से जुड़े विषयों पर लगातार काम करता रहा है. PACS आधारित स्मार्ट सहकारी मॉडल पर यह कार्यशाला ग्रामीण भारत को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
मकर संक्रांति की दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम में बोलते हुए PHDCCI के उप महासचिव डॉ. जतिंदर सिंह ने मकर संक्रांति के अवसर पर किसानों और ग्रामीण समुदायों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह पर्व मेहनत और समृद्धि का प्रतीक है. उन्होंने यह भी कहा कि सहकारिता मंत्रालय बनने से सहकारी संस्थाओं को नई ताकत मिली है. PACS को तकनीक, स्मार्ट सेवाओं और संस्थागत सहयोग के ज़रिये मजबूत करना जरूरी है, ताकि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को नए अवसर मिल सकें.
कार्यशाला के अंत में यह संदेश रहा कि सरकार, सहकारी संस्थाएं और उद्योग मिलकर PACS को सशक्त बनाएंगे. यही संस्थाएँ ग्रामीण समृद्धि, नवाचार और समावेशी विकास का रास्ता खोलेंगी और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाएंगी.
-भारत एक्सप्रेस
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