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क्या एआई खा जाएगा नौकरियां? एंथ्रोपिक की रिपोर्ट ने किया बड़ा खुलासा

एंथ्रोपिक की नई रिपोर्ट के अनुसार, एआई से फिलहाल सामूहिक बेरोजगारी का खतरा नहीं है, लेकिन एंट्री-लेवल नौकरियों में फ्रेशर्स की भर्ती कम हो रही है. व्हाइट-कॉलर जॉब्स पर जोखिम बढ़ रहा है.

AI Impact on Jobs

ये इमेज एआई द्वारा बनाई गई है.

आजकल हर दूसरे दफ्तर या चाय की दुकान पर एक ही चर्चा है “भाई, ये एआई (AI) सब की नौकरियां तो नहीं खा जाएगा?” सोशल मीडिया पर डर का माहौल है, लेकिन हकीकत क्या है? एआई बनाने वाली दिग्गज कंपनी ‘एंथ्रोपिक’ (Anthropic) की एक ताजा रिपोर्ट सामने आई है, जिसने लेबर मार्केट पर एआई के असर के बारे में बताया है. इस रिपोर्ट के नतीजे जितने राहत देने वाले हैं, उतने ही चौंकाने वाले भी.

‘फ्रेशर्स’ के लिए राह मुश्किल

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल दुनिया में एआई की वजह से ‘सामूहिक बेरोजगारी’ (Mass Unemployment) जैसी कोई स्थिति नहीं दिख रही है. लेकिन एंट्री-लेवल यानी फ्रेशर्स के लिए नौकरियां पाना अब पहले जैसा आसान नहीं रहा.

2022 के बाद से देखा गया है कि जिन सेक्टर्स में एआई का दखल ज्यादा है, वहां नई भर्तियों की रफ्तार सुस्त पड़ गई है. कंपनियां अब किसी नए लड़के को काम सिखाने के बजाय यह देख रही हैं कि क्या वह काम चैटजीपीटी या क्लाउड जैसे एआई टूल्स से कम खर्च में हो सकता है. यानी, जो दरवाजे पहले नए टैलेंट के लिए खुले रहते थे, उनके पीछे अब एआई की दीवार खड़ी हो रही है.

रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘व्हाइट-कॉलर’ और ‘नॉलेज-बेस्ड’ जॉब्स पर एआई की नजर सबसे ज्यादा है. कंप्यूटर प्रोग्रामर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, कस्टमर सर्विस, मार्केट रिसर्च एनालिस्ट और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स. इन कामों को एआई मॉडल्स (LLMs) बहुत तेजी से और सटीकता के साथ कर रहे हैं. वहीं, कुक, मैकेनिक, लाइफगार्ड, बारटेंडर और अटेंडेंट जैसे कामों में जो इंसानी स्पर्श और चतुराई चाहिए, वह एआई के पास अभी नहीं है. एक रोबोट खाना बना सकता है, पर स्वाद और माहौल का वह जादू नहीं ला सकता जो एक इंसान लाता है.

जटिलताओं को समझने में पीछे

रिपोर्ट में एक बहुत दिलचस्प बात कही गई है कि एआई की ‘क्षमताओं’ और उसके ‘असल इस्तेमाल’ के बीच अभी बहुत बड़ा फासला है. कागजों पर या विज्ञापनों में एआई जो भी कर ले, लेकिन असल दुनिया की जटिलताओं को सुलझाने में वह अभी भी इंसानों से पीछे है. यही वजह है कि कंपनियां फिलहाल पूरी तरह से इंसानों को हटाकर एआई के भरोसे बैठने का जोखिम नहीं उठा पा रही हैं.

कंपनियों की जंग

इस बीच एआई की दुनिया में वर्चस्व की लड़ाई भी तेज हो गई है. ओपनएआई (ChatGPT), गूगल (Gemini) और एंथ्रोपिक (Claude) के बीच मुकाबला गलाकाट है. क्लाउड एआई (Claude AI) की लोकप्रियता जिस तेजी से बढ़ी है, उसने बाजार के समीकरण बदल दिए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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