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वाशिम नकल कांड: छात्रों के बाद अब लापरवाह शिक्षकों पर गिरेगी गाज, शिक्षा विभाग ने शुरू की कार्रवाई की तैयारी

महाराष्ट्र के वाशिम में 12वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान मानोरा और रिसोड़ में बड़े पैमाने पर नकल पकड़ी गई है. अब उड़नदस्ते की रडार पर वो कर्मचारी हैं जिनकी ड्यूटी के दौरान ये गड़बड़ी हुई.

Maharashtra Washim Cheating Case

ये इमेज एआई द्वारा निर्मित की गई है.

महाराष्ट्र के वाशिम जिले में इन दिनों 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि खबरों में छात्रों की मेहनत से ज्यादा ‘नकल’ के किस्से सुर्खियां बटोर रहे हैं. प्रशासन ने ढिंढोरा तो पीटा था “नकल मुक्त अभियान” का, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. मानोरा और रिसोड़ तहसीलों से जो तस्वीरें और आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने शिक्षा विभाग की नींद उड़ा दी है. अब आलम यह है कि गाज सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों पर भी गिरने वाली है जिनकी नाक के नीचे यह सब चल रहा था.

कैसे फेल हुआ निगरानी सिस्टम?

मामला तब गरमाया जब परीक्षा केंद्रों पर अचानक उड़नदस्तों (फ्लाइंग स्क्वाड) की एंट्री हुई. जांच के दौरान मानोरा तालुका में 19 छात्र नकल करते रंगे हाथों पकड़े गए. हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से 17 छात्र तो अकेले रुई गोस्ता के एक ही स्कूल के थे. इसके बाद रिसोड़ तालुका में भी सिलसिला थमा नहीं और वहां भी 21 छात्र पर्चियों के साथ धरे गए. जब चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के दावे किए गए थे, तब इतनी बड़ी तादाद में छात्र नकल करने की हिम्मत कैसे जुटा पाए? यह सवाल अब हर अभिभावक और जागरूक नागरिक के मन में खटक रहा है.

रडार पर आए परीक्षा ड्यूटी के कर्मचारी

अभी तक तो सिर्फ छात्रों के खिलाफ केस दर्ज हो रहे थे, लेकिन अब प्रशासन ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. शिक्षा विभाग के रडार पर अब वो शिक्षक और कर्मचारी हैं जो उस वक्त केंद्रों पर ड्यूटी दे रहे थे. शुरुआती जांच में कुछ नाम सामने भी आ चुके हैं, जिन्हें कारण बताओ नोटिस और कार्रवाई के पत्र (चार्जशीट) जारी कर दिए गए हैं. विभाग अब उनसे जवाब मांग रहा है कि आखिर आपकी मौजूदगी में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई? क्या यह केवल निगरानी में हुई चूक थी या फिर कहानी कुछ और ही है?

साख बचाने की चुनौती

वाशिम की इस घटना ने बोर्ड परीक्षाओं पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है. लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या “नकल मुक्त अभियान” सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित है? अगर दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो उन ईमानदार छात्रों का क्या होगा जो दिन-रात पढ़ाई करके परीक्षा दे रहे हैं. फिलहाल, पूरा मामला विभागीय जांच की मेज पर है और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस नकल माफिया और लापरवाह तंत्र पर कितनी सख्ती दिखाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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