Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर भड़का ब्राह्मण समाज, विंध्याचल धाम में ‘बुद्धि शुद्धि यज्ञ’ कर जताया विरोध

ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ विवादों के घेरे में आ गई है. मिर्जापुर के विंध्याचल धाम में ब्राह्मण समाज ने फिल्म के शीर्षक और “लंगोट का ढीला” जैसे संवादों को समाज का अपमान बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की.

Ghooskhor Pandit Movie Controversy

अम्बुज द्विवेदी/मिर्ज़ापुर: विंध्याचल धाम में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर ब्राह्मण समाज ने कड़ा विरोध दर्ज कराया. समाज के लोगों ने फिल्म के शीर्षक और संवादों को आपत्तिजनक बताते हुए इसे ब्राह्मण समाज की छवि को बदनाम करने वाला करार दिया. विरोध के दौरान मां विंध्यवासिनी मंदिर प्रांगण में बुद्धि शुद्धि यज्ञ का आयोजन किया गया और बैनर-पोस्टर के साथ प्रदर्शन किया गया.

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मनोरंजन के नाम पर समाज विशेष का अपमान किया जा रहा है, जो की बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने फिल्म के नाम और विवादित संवादों को हटाने, दोषियों पर कार्रवाई की मांग की और साथ ही चेतावनी दी कि इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है.

फिल्म पर ब्राह्मण समाज का आक्रोश

जल्द रिलिज हो रही फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर ब्राह्मण समाज के लोगों ने गहरी आपत्ति जताई है और बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया गया और ब्राह्मणों ने आरोप लगाया कि ये ब्राह्मणों को बदनाम कर समाज में जहर घोलने का काम कर रही है. साथ ही कहा कि फिल्म का नाम और इसके संवाद समाज विशेष की छवि को धूमिल करने वाले हैं.

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मनोरंजन के नाम पर एक सम्मानित समाज ब्राम्हण को अपमानित किया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

यज्ञ के माघ्यम से बुद्धी शुद्धि की कामना की गई

यज्ञ के माध्यम से फिल्म से जुड़े कलाकारों, निर्देशक और ओटीटी प्लेटफॉर्म के “बुद्धि शुद्धि” की कामना की गई. ब्राह्मण समाज के तरुण पाण्डेय और आशुतोष पाठक ने बताया कि फिल्म में एक संवाद है, जिसमें कहा गया है कि “ब्राह्मण लंगोट का ढीला होता है.” इस प्रकार के संवाद बेहद आपत्तिजनक हैं और केवल ब्राह्मण समाज को बदनाम करने की मंशा से डाले गए हैं. उन्होंने कहा कि फिल्म का शीर्षक भी जानबूझकर ऐसा रखा गया है, जिससे समाज की छवि को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जा सके.

ये भी पढ़ें- पप्पू यादव की रात भारी गुजरी! तबीयत बिगड़ने पर PMCH रेफर, जानें क्या 1995 का केस?

‘पंडित’ नाम से लोगों में आक्रोश, जांच की मांग

समाज के लोगों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी फिल्म या रचनात्मक अभिव्यक्ति के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समाज विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाना अनुचित है. इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका रहती है. उन्होंने फिल्म के नाम और विवादित संवादों को तत्काल हटाने की मांग करते हुए दोषियों को दंडित किए जाने की मांग की गई.

बता दें कि इस फिल्म के मुख्य पात्र की भूमिका अभिनेता मनोज बाजपेयी निभा रहे हैं, जो फिल्म में एक पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका में हैं. फिल्म में उन्हें ‘पंडित’ नाम से संबोधित किया गया है. फिल्म को लेकर लोगों में आक्रोश व्याप्त हैं.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital