भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई (BR Gavai) ने एक बार फिर राज्य सरकारों की बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. मॉरीशस में दिए गए अपने भाषण में उन्होंने साफ कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था कानून के शासन से चलती है, न कि बुलडोजर के डर से. उन्होंने अपने उस फैसले का भी जिक्र किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने ‘बुलडोजर न्याय’ की कड़ी निंदा की थी.
CJI गवई ने क्या कहा?
जस्टिस गवई (BR Gavai) ने कहा कि किसी अपराध के जवाब में आरोपी के घर को तोड़ना कानून का उल्लंघन है. यह संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ है जो हर नागरिक को जीवन और रहने का अधिकार देता है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक साथ न्यायाधीश, जूरी और कार्यकारी नहीं बन सकती. ऐसे कदम न्याय के मूल सिद्धांतों को नुकसान पहुंचाते हैं.
भाषण में कई ऐतिहासिक फैसलों का उल्लेख
अपने भाषण में उन्होंने (BR Gavai) भारत के कई ऐतिहासिक फैसलों का भी उल्लेख किया. सबसे पहले उन्होंने 1973 के केशवानंद भारती केस की बात की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की मूल संरचना को बचाए रखने का सिद्धांत तय किया था. इस फैसले ने संसद की संशोधन शक्तियों पर सीमाएं तय कीं और लोकतंत्र की नींव को मजबूत किया.
तीन तलाक पर फैसले का जिक्र
इसके अलावा उन्होंने तीन तलाक को खत्म करने वाले फैसले का भी जिक्र किया, जिसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया. साथ ही उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को चुनौती देने वाले मामले की भी चर्चा की, जो चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा है.
मुख्य न्यायाधीश का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई हिस्सों में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बहस चल रही है. उनका कहना है कि न्याय का रास्ता कानून से होकर गुजरता है न कि ताकत के प्रदर्शन से.
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-भारत एक्सप्रेस
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