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ग्वालियर में ‘शोले’ जैसा सीन: ‘जनता प्यासी रही तो जान दे दूंगा’; आधी रात को नग्न होकर टंकी पर पहुंचे कांग्रेस पार्षद

ग्वालियर में पानी की किल्लत को लेकर कांग्रेस पार्षद विनोद यादव ने कपड़े उतारकर टंकी में कूदने का प्रयास किया. आक्रोशित जनता ने निगम कर्मचारियों को बंधक बनाया, जिसके बाद प्रशासन ने रातों-रात सप्लाई बहाल की.

Gwalior Water Crisis Congress Councilor Vinod Yadav High Voltage Drama at Water Tank

Gwalior Water Crisis: मनोज/ ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसी खबर आई है जिसने नगर निगम से लेकर पुलिस प्रशासन तक के हाथ-पांव फुला दिए. पानी की किल्लत से परेशान एक पार्षद का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने आधी रात को बीच सड़क पर कपड़े उतार दिए और सीधे पानी की टंकी पर चढ़ने पहुंच गए. मामला वार्ड नंबर 14 का है, जहां कांग्रेस पार्षद और मेयर-इन-काउंसिल (MIC) सदस्य विनोद उर्फ माठू यादव ने पानी न मिलने के विरोध में आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की. उनका साफ कहना था कि अगर उनकी जनता प्यासी रहेगी, तो वे या तो खुद मरेंगे या फिर व्यवस्था को सुधारने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे.

आधी रात को हाईवोल्टेज ड्रामा

पार्षद विनोद यादव का आरोप है कि नूरगंज इलाके में पिछले कई दिनों से पानी की सप्लाई ठप पड़ी है. बार-बार अधिकारियों को फोन करने और दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उनका सब्र टूट गया. देर रात वे नूरगंज स्थित पानी की टंकी पर पहुंचे और विरोध स्वरूप अपने कपड़े उतार दिए.

जैसे ही स्थानीय लोगों को पता चला कि उनके पार्षद टंकी से कूदकर जान देने की कोशिश कर रहे हैं, वहां भारी भीड़ जमा हो गई. लोगों का गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने मौके पर मौजूद नगर निगम के कर्मचारियों को बंधक बना लिया. मोहल्ले वालों का कहना था कि जब तक बूंद-बूंद के लिए तरस रहे लोगों को पानी नहीं मिलता, तब तक किसी को जाने नहीं दिया जाएगा.

‘मरूंगा या मारूंगा’

टंकी के पास खड़े पार्षद माठू यादव ने खुलेआम चेतावनी दी कि वे जनता के हक के लिए अपनी जान देने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी टंकी को जानबूझकर सबसे आखिर में भरा जाता है, जिससे उनके क्षेत्र में पानी पहुंच ही नहीं पाता.

पार्षद ने तल्ख तेवर में कहा, ‘अधिकारी बंगलों में ठंडी हवा खा रहे हैं और गरीब जनता प्यासी मर रही है. अब आर-पार की लड़ाई होगी.’ उनके इस उग्र रूप को देखकर मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी सहम गए.

रातों-रात सुधारी गई मोटर

जब मामला हाथ से निकलता दिखा और पार्षद के साथ-साथ पूरी जनता सड़क पर उतर आई, तब जाकर नगर निगम के बड़े अधिकारियों की नींद खुली. आनन-फानन में तकनीकी टीम को नूरगंज भेजा गया. जांच में पता चला कि मोटर का स्टार्टर खराब था, जिसे काफी समय से ठीक नहीं किया गया था.

दबाव के चलते टीम ने रातों-रात स्टार्टर दुरुस्त किया और टंकी भरने का काम शुरू हुआ. जब टंकी पूरी भर गई और पानी की सप्लाई सुनिश्चित हुई, तब कहीं जाकर पार्षद नीचे उतरे और बंधक बनाए गए कर्मचारियों को छोड़ा गया.

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-भारत एक्सप्रेस



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