प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 135वें एपिसोड में मेघालय के विश्व प्रसिद्ध ‘लिविंग रूट ब्रिज’ की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि मेघालय की पहचान सिर्फ वहां के खूबसूरत बादलों और वादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां के लोगों द्वारा रबर के पेड़ों की जड़ों से तैयार किए गए ये अनोखे पुल पूरी दुनिया के लिए अजूबा हैं.
दशकों की मेहनत और धैर्य की मिसाल
पीएम मोदी ने बताया कि ये रूट ब्रिज सीमेंट या लोहे के सामान्य पुलों की तरह नहीं होते. इन्हें स्थानीय जनजातियों द्वारा रबर के पेड़ों की जीवित जड़ों को धीरे-धीरे सही दिशा देकर नदी-झरनों के पार ले जाकर तैयार किया जाता है. इस काम में कुछ दिन या साल नहीं, बल्कि कई दशक का समय लग जाता है. यह इंसान और प्रकृति के बीच के गहरे जुड़ाव और धैर्य का सबसे खूबसूरत उदाहरण है. समय के साथ ये पुल कमजोर होने के बजाय और ज्यादा मजबूत होते जाते हैं.
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को एक बड़ी खुशखबरी देते हुए बताया कि भारत सरकार ने इन अद्भुत रूट ब्रिजों को यूनेस्को (UNESCO) की ‘वर्ल्ड हेरिटेज साइट’ की लिस्ट में शामिल कराने के लिए आधिकारिक आवेदन किया है.
पद्म पुरस्कार विजेता हैली वार जी का जिक्र
जलवायु परिवर्तन के इस दौर में इन पुलों को बचाने के लिए पीएम मोदी ने मेघालय के स्थानीय समुदायों की पीठ थपथपाई. उन्होंने बताया कि आज वहां के लोग खुद आगे आकर 120 से अधिक ऐसे रूट ब्रिजों की देखरेख कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने इस मुहिम से जुड़े ‘हैली वार जी’ का विशेष रूप से नाम लिया, जिन्हें इस साल पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. हैली वार जी ने अपने जीवन के 50 से ज्यादा साल इन पुलों के संरक्षण में लगा दिए.
आखरी में पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की कि जो लोग भी मेघालय घूम चुके हैं, वे इन पुलों की तस्वीरें और अपने अनुभव सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें ताकि पूरी दुनिया भारत की इस अनोखी विरासत को जान सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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