Rajasthan High Court
रिपोर्ट- प्रदीप कुमार जोशी
Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की पंजीकृत गौशालाओं में पेयजल संकट को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है. न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2023-24 के बजट में घोषणा होने के बावजूद चार वर्षों में भी गौशालाओं में स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए कोई प्रभावी कार्य नहीं हुआ. कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए सरकार को 15 दिन के भीतर वित्त विभाग से अनुमोदित समयबद्ध कार्ययोजना (Time Bound Schedule) प्रस्तुत करने का आदेश दिया है.
न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने गो ग्राम सेवा संघ, बीकानेर की जनहित याचिका (डी.बी. सिविल रिट पिटीशन संख्या 912/2024) पर 6 जुलाई 2026 को यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया.
3,861 गौशालाएं, 2,220 में ट्यूबवेल नहीं
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार राजस्थान में 3,861 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं. इनमें से 1,641 गौशालाओं में स्वयं का ट्यूबवेल उपलब्ध है, जबकि 2,220 गौशालाएं ऐसी हैं जहां स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए ट्यूबवेल लगाने की आवश्यकता है.
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार प्रयासों का दावा किए जाने के बावजूद जमीन पर एक भी ऐसी गौशाला में स्थायी पेयजल सुविधा विकसित नहीं की गई, जहां इसकी आवश्यकता थी.
740 गौशालाओं की स्थिति सबसे गंभीर
राज्य सरकार ने स्वयं स्वीकार किया कि 740 गौशालाएं अत्यधिक संकटग्रस्त हैं और वहां तत्काल पेयजल अवसंरचना विकसित करने की जरूरत है. इसके लिए सरकार ने तीन चरणों में योजना प्रस्तुत की-
- प्रथम चरण: 387 गौशालाएं (सरकारी भूमि पर)
- द्वितीय चरण: 234 गौशालाएं (स्वामित्व अथवा निजी भूमि पर)
- तृतीय चरण: 323 गौशालाएं (दान अथवा किराए की भूमि पर)
कोर्ट बोला- चार वर्षों से केवल आश्वासन
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2022 से लगातार आदेश पारित किए जा रहे हैं. 2023, 2024, 2025 और अब 2026 तक भी स्थायी समाधान लागू नहीं हो पाया. गर्मी के मौसम में भी सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि गौशालाओं में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था की गई है.
कोर्ट ने कहा कि केवल अस्थायी पानी के टैंकर या अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं. राज्य को दीर्घकालीन एवं स्थायी समाधान लागू करना होगा.
अवमानना की कार्रवाई बनती है, लेकिन फिलहाल टाली
खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया अवमानना (Contempt) की कार्रवाई बनती है, क्योंकि पूर्व आदेशों का पालन नहीं हुआ. हालांकि अतिरिक्त महाधिवक्ता, पशुपालन विभाग के सचिव और गोपालन विभाग की निदेशक द्वारा दिए गए आश्वासन को देखते हुए फिलहाल अवमानना पर विचार स्थगित कर दिया गया.
15 दिन में वित्त विभाग से स्वीकृत योजना पेश करने के निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि 15 दिनों के भीतर वित्त विभाग से परामर्श एवं स्वीकृति प्राप्त समयबद्ध कार्ययोजना न्यायालय में प्रस्तुत की जाए. यह योजना 21 जुलाई 2026 तक कोर्ट के समक्ष दाखिल की जाए. किसी भी स्थिति में योजना का क्रियान्वयन तीन माह के भीतर शुरू किया जाए. व्यवहारिक रूप से कार्य 1 अक्टूबर 2026 से पहले प्रारंभ होना चाहिए.
याचिकाकर्ता के सुझावों पर भी विचार
याचिकाकर्ता की ओर से तीन सुझाव दिए गए, जिन पर कोर्ट ने सरकार को विचार करने की स्वतंत्रता दी-
जहां संभव हो, तीन फेज बिजली कनेक्शन के बजाय सिंगल फेज कनेक्शन देकर ट्यूबवेल शीघ्र शुरू किए जाएं.
मानसून आने तक गौशालाओं में वर्तमान अस्थायी पेयजल व्यवस्था पूरी मजबूती से जारी रखी जाए ताकि पशुओं को पानी की कमी न हो.
जिन क्षेत्रों में भूजल उपलब्ध नहीं है, वहां ट्यूबवेल के स्थान पर पाइपलाइन अथवा वाटर होज व्यवस्था को वैकल्पिक समाधान के रूप में अपनाने पर विशेषज्ञ निर्णय लें.
वित्त सचिव को भी बनाया पक्षकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मौखिक प्रार्थना पर राजस्थान सरकार के वित्त विभाग के सचिव को भी मामले में प्रतिवादी बनाया गया है. कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं.
हालांकि अगली सुनवाई पर पशुपालन विभाग के सचिव एवं गोपालन विभाग की निदेशक की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी गई है.
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हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 निर्धारित की है. तब तक राज्य सरकार को वित्त विभाग की स्वीकृति सहित विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी.
-भारत एक्सप्रेस
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