भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद दिल्ली को आखिरकार नया मुख्यमंत्री मिल गया है. रामलीला मैदान में आयोजित भव्य शपथग्रहण समारोह में शालीमार बाग से पहली बार विधायक बनीं रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे. वह दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री बनीं. उनसे पहले सुषमा स्वराज (बीजेपी), शीला दीक्षित (कांग्रेस) और आतिशी मर्लेना (आप) दिल्ली की महिला मुख्यमंत्री रह चुकी हैं.
यह बीजेपी के लिए ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि पार्टी ने 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी की है. रेखा गुप्ता के नेतृत्व में पार्टी को नई दिशा देने की जिम्मेदारी दी गई है.
रेखा गुप्ता का राजनीतिक सफर
रेखा गुप्ता पहली बार विधायक बनी हैं, लेकिन राजनीति में उनकी भूमिका नई नहीं है. वह तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं और तीन बार एमसीडी की पार्षद भी रह चुकी हैं. संगठन में वह बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रही हैं. छात्र राजनीति से उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. वह दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) की अध्यक्ष रह चुकी हैं.
बचपन से ही उनका झुकाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर रहा. संघ प्रचारक प्रेम जी गोयल के मार्गदर्शन में उन्होंने नेतृत्व कौशल विकसित किया. 1994 में दौलत राम कॉलेज की सचिव बनीं, 1995 में DUSU की सचिव और 1996 में अध्यक्ष बनीं.
2003-04 में उन्होंने बीजेपी युवा मोर्चा (BJYM) की सचिव का पद संभाला और 2004-06 में राष्ट्रीय सचिव रहीं. 2007 और 2012 में वह पीतमपुरा उत्तर (वार्ड 54) से पार्षद बनीं. 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2022 में वह फिर से एमसीडी पार्षद बनीं. 2023 में वह दिल्ली मेयर चुनाव में बीजेपी की प्रत्याशी थीं, लेकिन आम आदमी पार्टी की शैली ओबराय से हार गईं.
छह मंत्रियों ने भी ली शपथ
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ उनकी कैबिनेट के छह मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की.
प्रवेश वर्मा- प्रवेश वर्मा जाट समुदाय से आते हैं. वह दो बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं. उनके पिता साहिब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके थे. 2013 में वह महरौली से विधायक बने. 2014 और 2019 में पश्चिमी दिल्ली से सांसद रहे. 2024 में लोकसभा का टिकट नहीं मिला, लेकिन विधानसभा चुनाव में उन्होंने अरविंद केजरीवाल को हराकर चर्चा में आए.

आशीष सूद- पंजाबी समुदाय से आने वाले आशीष सूद पहली बार विधायक बने हैं. वह दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) के अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा, दिल्ली बीजेपी में उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव की भूमिका निभा चुके हैं. वह दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में पार्षद और नेता सदन भी रह चुके हैं. गोवा में बीजेपी के प्रभारी और जम्मू-कश्मीर में सह-प्रभारी भी हैं.

मनजिंदर सिंह सिरसा- सिख समुदाय के जाने-माने नेता मनजिंदर सिंह सिरसा तीन बार विधायक रह चुके हैं. वह दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. 2021 में उन्होंने अकाली दल छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था. 2007 में पंजाबी बाग से पार्षद बने और 2013 में राजौरी गार्डन से विधायक बने. 2017 में उपचुनाव और 2025 में बीजेपी के टिकट पर फिर से विधायक बने.

रविंद्र सिंह- रविंद्र सिंह दलित समुदाय से आते हैं. वह पहली बार बवाना सीट से विधायक बने हैं. बीजेपी की नजर दिल्ली के 16% दलित वोटों पर है. 2020 में भी उन्होंने चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे. इस बार उन्होंने आम आदमी पार्टी के जय भगवान को 31 हजार से ज्यादा वोटों से हराया.

कपिल मिश्रा- ब्राह्मण और पूर्वांचली समुदाय से आने वाले कपिल मिश्रा करावल नगर से दो बार विधायक रह चुके हैं. वह दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. 2013 में आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 2015 में विधायक बने और 2015-17 तक दिल्ली के जल मंत्री रहे. 2017 में मंत्री पद से हटाए जाने के बाद 2019 में बीजेपी में शामिल हो गए. 2020 में मॉडल टाउन से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए.

पंकज कुमार सिंह- पूर्वांचली राजपूत समुदाय से आने वाले पंकज कुमार सिंह पहली बार विधायक बने हैं. वह विकासपुरी से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. इससे पहले वह एमसीडी में दो बार पार्षद रह चुके हैं. वह दिल्ली बीजेपी के पूर्वांचल मोर्चा के महासचिव भी रह चुके हैं. मूल रूप से बिहार के रहने वाले पंकज सिंह चार बार पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं.

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-भारत एक्सप्रेस
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