Bharat Express DD Free Dish

‘सफेद रंग का मोर’ और ‘गोल्डन सांभर’: राजस्थान में सरिस्का टाइगर रिजर्व के इतिहास में पहली बार देखे गए दो दुर्लभ जीव

WILDLIFE WONDER At Sariska: राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में ‘सफेद रंग का मोर’ और सोने की तरह चमकने वाले ‘गोल्डन सांभर’ पहली बार दिखे हैं. यहां बाघों की संख्‍या भी लगातार बढ़ रही है. 2026 खत्‍म होने तक यहां 60 बाघ हो सकते हैं.

Sariska White Peacock Golden Sambar

'सफेद रंग का मोर' और 'गोल्डन सांभर'

राजस्थान का अलवर जिला इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है. यहां बाघ-बाघिनों के लिए प्रसिद्ध जंगल सरिस्का टाइगर रिजर्व (Sariska Tiger Reserve) के इतिहास में पहली बार दो बेहद दुर्लभ जीव देखे गए हैं. इनमें से एक दूधिया ‘सफेद रंग का मोर’ है, तो दूसरा चमकीली धूप में सोने की तरह चमकता ‘गोल्डन सांभर’. राजस्थान के किसी भी सरकारी या प्राकृतिक जंगल में इससे पहले कभी सफेद मोर नहीं देखा गया है. इस अभूतपूर्व नजारे की तस्वीरें सामने आई हैं. इस खबर में दुर्लभ सफेद मोर को झाड़ियों के बीच देखा जा सकता है, जबकि दूसरी तस्‍वीर में सोने जैसी चमक वाला दुर्लभ गोल्डन सांभर नजर आ रहा है.

बाघिन ST-19 के बफर जोन में दिखे जीव

सफेद रंग का मोर सरिस्का के बफर जोन, विशेषकर बाला किला और गंगोडी इलाके के आस-पास जून के पहले सप्ताह में देखा गया. सबसे पहले जंगल में गश्त और ट्रैकिंग करने वाले वनकर्मियों ने इसे उड़ते हुए देखा था, लेकिन उस वक्त उसकी तस्वीर नहीं ली जा सकी थी. बाद में ओडिशा के एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ने कड़ी मशक्कत के बाद इसकी खूबसूरत तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कीं. अब पर्यटकों को इस खास जोन में बाघिन ST-19 और अन्य 12 बाघों के साथ इस दुर्लभ मोर के भी दीदार हो रहे हैं.

Rare White Peacock
सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर जोन में सफेद मोर. इस जोन में ही एसटी-19 (बाघिन) भी है.

क्या है ‘गोल्डन सांभर’ का वैज्ञानिक रहस्य?

दूसरा अनोखा जीव ‘गोल्डन सांभर’ है, जो जंगल में घूमता दिखाई दिया है. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसे सामने से देखने पर जब धूप इसके बदन पर पड़ती है, तो इसका शरीर बिल्कुल सोने की तरह चमकता है. टाइगर एक्सपर्ट निरंजन सिंह ने बताया कि सफेद मोर और गोल्डन सांभर का एक साथ मिलना दुर्लभ घटना है. विज्ञान की भाषा में कहें तो इनके रंग में यह अनोखा बदलाव पिगमेंटेशन (Melanism या Albinism) या हार्मोन्स में गड़बड़ी, जिसे ‘जीनेटिक म्यूटेशन’ कहा जाता है, उसके कारण हो सकता है.

tiger
सरिस्का टाइगर रिजर्व में धूप में सोने की तरह चमकता ‘गोल्डन सांभर’ भी दिखा.
सरिस्का में बाघ

सरिस्का में 0 से 56 हो गई बाघों की संख्‍या

दिलचस्प बात यह है कि करीब 18 साल पहले (साल 2005 के आसपास) सरिस्का पूरी तरह से ‘टाइगर विहीन’ हो चुका था, जहां एक भी बाघ नहीं बचा था. लेकिन सरकार और वन विभाग के अथक प्रयासों से आज यहां बाघों का कुनबा बढ़कर 56 हो गया है. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट हिमांशु शर्मा के मुताबिक, सरिस्का में अभी 56 बाघ हैं और खास बात यह है कि पिछले 2 साल में ही यहां 25 स्वस्थ शावकों का जन्म हुआ है. इस अभूतपूर्व सफलता पर रिसर्च करने के लिए देश के कई वन अधिकारी इन दिनों अलवर में डेरा डाले हुए हैं. सूबे के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने भरोसा जताया है कि वर्ष 2026 के भीतर ही सरिस्का में बाघों का आंकड़ा 60 के पार निकल जाएगा और आने वाले कुछ सालों में यहां 100 से ज्यादा टाइगर दहाड़ेंगे.

सरिस्का में बाघ

सरिस्का: जैव-विविधता और विदेशी पक्षी

सरिस्का टाइगर रिजर्व केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि कई तरह के प्राणियों का प्राकृतिक निवास स्थान है. यहां तेंदुए (Leopards), जंगली बिल्ली, सियार, लकड़बग्घा, चौसिंगा, चीतल, और नीलगाय जैसे सैकड़ों प्रजाति के जीव रहते हैं.

पशु-पक्षियों के आगमन की बात करें तो सरिस्का में देश-विदेश के कई कोनों से पक्षी आते हैं. सर्दियों के मौसम में (अक्टूबर से फरवरी के बीच) यहां साइबेरियन पक्षी और मध्य एशिया के प्रवासी पक्षी भी भारी तादाद में डेरा डालते हैं. पानी के प्रमुख स्रोतों और घने जंगलों की वजह से यह स्थान विदेशी पक्षियों को खूब रास आता है.

यह भी पढ़िए: भारत में अब साढ़े 3 हजार से ज्‍यादा बाघ: सफेद बाघिन ‘मीरा’ ने टाइगर स्टेट में 3 शावकों को दिया जन्म, बना यह रिकॉर्ड

peacock vegetarian or non vegetarian

राष्ट्रीय पक्षी मोर: अब घट रही देश में तादाद

मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और देश के सांस्कृतिक व धार्मिक इतिहास से इसका गहरा नाता है. अब से करीब 5 हजार साल पहले, यानी द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के समय में भारत में मोरों की बहुत बड़ी तादाद होती थी. कान्हा के मुकुट की पहचान ही ‘मोरपंख’ से जुड़ी हुई है.

peacock vegetarian or non vegetarian

अब भारत में सामान्‍यत: ‘ब्लू पीकॉक’ (नीला मोर) रहते हैं, जबकि हरी प्रजाति के मोर म्यांमार सीमा के पास दिखते हैं. वैसे अभी भारत में मोरों की संख्या लाखों में है, लेकिन अब इनकी तादाद कम होती जा रही है. देश में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के अर्ध-शुष्क व मैदानी इलाकों में मोर ज्यादा मिलते हैं.

animal wildlife sanctuary in india tiger

1 नजर में सरिस्का अभयारण्य के वन्यजीव

विषय महत्वपूर्ण आंकड़े
कुल बाघ वर्तमान में 56 बाघ (शावकों सहित) मौजूद हैं.
बर्थ रिकॉर्ड पिछले 2 वर्षों में रिकॉर्ड 25 शावकों का जन्म हुआ.
दुर्लभ खोज (2026) सरिस्का में पहली बार ‘सफेद मोर’ और ‘गोल्डन सांभर’ स्पॉट किए गए.
प्रवासी पक्षियों का सीजन अक्टूबर से फरवरी के बीच यहां साइबेरियन पक्षियों का आगमन होता है.


यह भी पढ़िए: विदेश से भारत लाई गई मादा चीता ने इस नेशनल पार्क में दिया 3 शावकों को जन्म, पर्यावरण मंत्री ने शेयर किया VIDEO


इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read