राजस्थान के अजमेर स्थित ऐतिहासिक अनासागर झील की सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार झील संरक्षण को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और यदि स्थिति नहीं सुधरी है तो अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी.
कोर्ट ने जताई नाराजगी
जस्टिस अभय ओका और उज्ज्वल भुइयां की पीठ नें राजस्थान के मुख्य सचिव को 21 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होनें का आदेश दिया है. वहीं कोर्ट ने मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि हमें आदेशों का अनुपालन चाहिए, बहाने नहीं. साथ ही कोर्ट नें इस बात पर नाराजगी जताई कि अधिकारी अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.
कोर्ट ने कहा राज्य के अधिकारी न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही कहा कि राज्य सरकार आनासागर झील की सुरक्षा को यदि इसी तरह टालती रहीं तो हम राज्य के अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेंगे.
कोर्ट ने लगाई फटकार
वहीं कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कौन होती हैं इस अदालत को आदेश देने वाली. कोर्ट ने कहा कि एनजीटी 21 दिसंबर 2022 के आदेश के बावजूद आनासागर झील के आसपास फुटपाथ और अन्य निर्माण कार्य कैसे हुए? कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि अजमेर की प्राकृतिक सुंदरता को नष्ट कर स्मार्ट सिटी बनाने की कोशिश क्यों कि जा रही है.
राज्य सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल शिव मंगल सिंह ने अदालत को बताया कि झील के आसपास अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
इस पर अदालत ने पूछा कि यह रिपोर्ट कहां है और आपने सेवन वंडर्स पार्क के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं? कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड इसी तरह गुमराह करती रही तो हम अवमानना की कार्यवाही शुरू करेंगे.
– भारत एक्सप्रेस
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