केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) विधेयक पर तमिलनाडु की साझा रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से बड़ा राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है. तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री विजय द्वारा चेन्नई में बुलाई गई इस बैठक का मुख्य विपक्षी दलों DMK और AIADMK ने पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया. राज्य के 57 सांसदों में से महज 25 सांसद ही इस बैठक में पहुंचे, जिससे परिसीमन जैसे अहम मुद्दे पर भी प्रदेश के राजनीतिक दलों में मतभेद साफ झलक रहा है.
विपक्ष ने क्यों बनाई दूरी?
बैठक का बहिष्कार करने वाले प्रमुख दलों में DMK और AIADMK के अलावा PMK, MNM और DMDK शामिल हैं. DMK सांसद कनिमोझी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि परिसीमन बिल का अभी तक कोई आधिकारिक या संशोधित ड्राफ्ट जारी ही नहीं हुआ है, ऐसे में इस पर चर्चा का कोई नया आधार नहीं बनता. विपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय यह बैठक बुलाकर मेकेदातु बांध और कावेरी जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.
बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?
बैठक में मौजूद 25 सांसदों में से ज्यादातर कांग्रेस और सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों से थे. इनमें कांग्रेस के 12 सांसद, जबकि VCK, CPI, CPI(M) के दो-दो और MDMK व IUML का एक-एक सांसद शामिल हुआ.
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर और MDMK नेता दुरई वाइको ने विपक्ष के इस बहिष्कार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि परिसीमन का सीधा असर राज्य के वित्तीय अधिकारों और दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा, इसलिए ऐसे मुद्दे पर पूरे प्रदेश का एक मंच पर होना बेहद जरूरी था.
बैठक में पास हुआ अहम प्रस्ताव
बैठक के बाद VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने बताया कि सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया है. इसमें मांग की गई है कि केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की कुल संख्या (543) और राज्यों में मौजूद सीटों के मौजूदा अनुपात को फ्रीज रखे. यानी तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में कोई कटौती न की जाए और यथास्थिति बनाए रखते हुए महिलाओं के आरक्षण को लागू किया जाए.
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-भारत एक्सप्रेस
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