राज्यसभा सांसद और यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) ने संसद में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ‘जिन्नाई सोच’ के तहत वंदे मातरम गीत को हिंदू और मुसलमानों में बांटने का काम किया. यह सब वोट बैंक की राजनीति के चलते किया गया था.
जन गण मन और वंदे मातरम में विभाजन की कोशिश
डॉ. दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) ने कहा कि विपक्ष ने जन गण मन और वंदे मातरम के बीच भी विभेद पैदा करने की कोशिश की. उन्होंने (Dinesh Sharma) आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम गीत के चार अंतरों को जानबूझकर हटाकर देश के साथ विश्वासघात किया. भारत माता की वंदना करने वाले हिस्सों को राजनीतिक तुष्टीकरण के लिए हटाया गया और देश की सांस्कृतिक जड़ों को सौदेबाजी का विषय बना दिया गया.
150 साल का उत्सव और बंकिम बाबू का योगदान
सांसद (Dinesh Sharma) ने कहा कि वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष का उत्सव भारत की आत्मा की आराधना के समान है. बंकिम बाबू ने 1875 में इस गीत को लिखकर आजादी की चेतना जगाई थी. इसमें भारत माता को ज्ञान की सरस्वती, समृद्धि की लक्ष्मी और शक्ति की दुर्गा के रूप में पूजित किया गया है. गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसे स्वर देकर क्रांति की धड़कन बना दिया.
नेहरू की सोच पर सवाल
डॉ. शर्मा (Dinesh Sharma) ने विपक्ष द्वारा दिए गए तर्कों को नकारात्मक बताते हुए कहा कि वंदे मातरम के अंतरों को हटाने का फैसला उचित नहीं था. उन्होंने दावा किया कि 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने अली सरदार जाफरी को लिखे पत्र में इस गीत को बेतुका बताया था और कहा था कि इसकी भाषा कठिन है. उन्होंने (Dinesh Sharma) यह भी कहा कि नेहरू की सोच ने समिति को प्रभावित किया, हालांकि जाफरी ने इसका समर्थन नहीं किया.
देशभक्त मुसलमान भी वंदे मातरम के साथ
डॉ. शर्मा (Dinesh Sharma) ने कहा कि अरुणा आसफ अली जैसे लोग वंदे मातरम कहकर भारत माता के प्रहरी बने. उस दौर में लाहौर से निकलने वाले वंदे मातरम अखबार के सभी कर्मचारी मुस्लिम थे. उन्होंने कहा कि देशभक्त मुसलमान वंदे मातरम के साथ थे लेकिन कांग्रेस ने अंग्रेजों की ‘बांटो और राज करो’ नीति को अपनाकर देशवासियों को बांट दिया.
एक भारत श्रेष्ठ भारत की जरूरत
सांसद (Dinesh Sharma) ने जोर देकर कहा कि देश पूर्ण वंदे मातरम का पक्षधर है और ऐसा कोई प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता जो देश की आत्मा को कमजोर करे. उन्होंने कहा कि आज की जरूरत ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ है जो आर्थिक रूप से मजबूत, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और आध्यात्मिक रूप से जागृत हो.
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डॉ. शर्मा (Dinesh Sharma) के बयान ने संसद में वंदे मातरम पर चल रही बहस को और तीखा बना दिया है, जहां सांस्कृतिक विरासत और राजनीति के बीच टकराव साफ दिखाई देता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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