केंद्र सरकार 1 जुलाई से ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी’ यानी VB-G RAM G लागू करने जा रही है. लेकिन इसके शुरू होने से पहले ही तीन राज्यों ने इस योजना के तहत आने वाले वित्तीय बोझ को लेकर आपत्ति जताई है. खास बात यह है कि इनमें से दो राज्य बीजेपी शासित हैं.
MGNREGA की जगह नई स्कीम
सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (MGNREGA) की जगह VB-G RAM G योजना पेश की है. इसमें खर्च का 60% हिस्सा केंद्र और 40% हिस्सा राज्य सरकारों को उठाना होगा. बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड ने इस पैटर्न पर सवाल उठाए हैं और केंद्र से बदलाव की मांग की है.
बिहार और मध्य प्रदेश पर भारी बोझ
बिहार सरकार को इस योजना के तहत करीब 4,477 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. NREGA संघर्ष मोर्चा का कहना है कि यह रकम 125 दिन काम देने के वादे को पूरा करने के लिए काफी नहीं है. उनके अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिहार को लगभग 15,939 करोड़ रुपये की जरूरत होगी. वहीं मध्य प्रदेश पर 4,168 करोड़ रुपये का बोझ है, जिससे राज्य केवल 43 दिन का काम ही दे पाएगा. अगर 125 दिन का काम देना हो तो खर्च 20,037 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.
झारखंड की स्थिति
झारखंड को इस योजना के तहत 1,804 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. इस बजट में राज्य केवल 41 दिन का काम दे सकता है. अगर 125 दिन का काम देना हो तो उसे करीब 9,293 करोड़ रुपये का भार उठाना पड़ेगा.
राज्यों की दलील
बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड ने साफ कहा है कि उनके लिए 40% हिस्सेदारी का बोझ उठाना बेहद कठिन है. सिक्किम और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी अपनी चिंता जताई है. इन राज्यों के लिए 90:10 का पैटर्न तय किया गया है. उत्तराखंड ने पहाड़ी इलाकों का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र को 100% खर्च खुद उठाना चाहिए.
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मजदूरी और भुगतान पर सवाल
पांच राज्यों ने ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने की मांग की है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि योजना के तहत मजदूरी और सामग्री के बिलों के भुगतान में देरी नहीं होनी चाहिए. राज्यों ने केंद्र से अपील की है कि VB-G RAM G में ऐसी समस्याएं न हों.
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-भारत एक्सप्रेस
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