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14 साल से प्लॉट का इंतजार! वाटिका ग्रुप के ठिकानों पर ईडी की रेड, लग्जरी गाड़ियां और ज्वैलरी जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर्स से जुड़े दिल्ली-एनसीआर के सात ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलाशी ली.

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प्रवर्तन निदेशालय ने रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड और उसके प्रमोटर डायरेक्टर्स से जुड़े ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है. ईडी के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत दिल्ली-एनसीआर में सात आवासीय और व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया.

ईडी की यह कार्रवाई वाटिका लिमिटेड, उसके प्रमोटर-डायरेक्टर्स अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और गौरव भल्ला समेत अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज ईसीआईआर के आधार पर की गई. यह मामला दिल्ली पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज एफआईआर.से जुड़ा है. जिनमें कथित तौर पर लोगों को धोखे से निवेश के लिए प्रेरित करने, रिहायशी प्लॉट नहीं देने और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं.

प्लॉट आवंटन के नाम पर बड़ी रकम लेने का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक अभी तक के जांच में वाटिका इंडिया नेक्स्ट और वाटिका इंडिया नेक्स्ट 2 परियोजनाओं में शिकायतकर्ताओं से प्लॉट आवंटन और बिक्री के नाम पर बड़ी रकम पहले ही ले ली गई थी. एजेंसी के.अनुसार वर्ष 2010 से 2012 के बीच पीड़ित पक्षों से करीब 260.3प करोड़ रुपए के लिए गए, लेकिन 120 करोड़ मूल्य का ही प्लॉट दिया गया. बाकी प्लॉट कई बार की तय समय सीमा बीतने के बावजूद करीब 14 साल बाद नही नही दिए गए.

एजेंसी ने यह भी कहा है कि इसी परियोजना में 14 प्लॉट पीड़ित कंपनी की सहमति लिए बिना कथित तौर पर तीसरे पक्ष को बेच दिए गए. जांच में वाटिका ग्रुप से जुड़ी जमीन मालिक और अन्य ग्रुप कंपनियों के साथ-साथ कई प्रमुख लोगों की भूमिका भी सामने आई है. छापेमारी के दौरान ईडी ने कई अहम दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं.

इनमें कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े संपत्ति दस्तावेज, पैसे की लेनदेन और डायवर्जन से जुड़े रिकॉर्ड शामिल है. इसके अलावे तीन लग्जरी गाड़ियां, ज्वेलरी और बैंक खातों एवं सिक्योरिटीज समेत करीब 33 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियों को जब्त या फ्रिज किया गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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