Justice BV Nagarathna
दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि भारत में कानून का राज इसलिए कायम है, क्योंकि देश की स्वतंत्र न्यायपालिका है और उसे स्वतंत्र बार का निरंतर सहयोग मिलता है.
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए वकीलों और न्यायधीशों की परस्पर प्रतिबद्धता बेहद अहम है. जस्टिस नागरत्ना ने विधि के स्नातक छात्रों से कहा कि वकील की जिम्मेदारी सिर्फ अपने मुवक्किल तक सीमित नहीं होती, बल्कि संविधान और समाज के प्रति भी होती है.
वकील जीवनभर के लिए संविधान का संरक्षक
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि संविधान उतना ही अच्छा होगा, जितना अच्छा उसे लागू करने वाले लोग होंगे. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि संविधान को उसकी व्यापकता और अच्छे इरादों के साथ लागू करने की जिम्मेदारी सिर्फ सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों की नहीं है, बल्कि सभी वकीलों की भी है.
उन्होंने कहा कि एक वकील जीवनभर संविधान का संरक्षक होता है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि नैतिक संकट के क्षणों में उनकी सत्यनिष्ठा ही सबसे बड़ी पहचान होगी.
निजी लाभ के लिए नहीं बल्कि समाज हित में करें इस्तेमाल
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि कानूनी प्राशिक्षण आपको तर्क करने, व्याख्या करने और मनाने की शक्ति देता है. लेकिन इस शक्ति के साथ विश्वास भी जुड़ा है कि आप इसे निजी लाभ के लिए नहीं बल्कि समाज के हित में इस्तेमाल करेंगे.
उन्होंने यह भी कहा कि कानून अक्सर अमीर और ताकतवरों का किला समझा जाता है, लेकिन वकीलों को इसे आम जनता तक पहुचने वाला पुल बनाना होगा. जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि याद रखिए कानून सबका है, लेकिन हर कोई इसकी पहुच का खर्च नही उठा सकता है. आप उस फर्क को ला सकते है, जिससे यह पहुच सभी के लिए संभव हो.
उन्होंने विधि छात्रों से यह भी कहा कि अपनी सफलता को केवल आर्थिक लाभ से न तौलें, बल्कि समाज पर डाले गए सकरात्मक प्रभाव से मापें.
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-भारत एक्सप्रेस
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