निठारी हत्याकांड मामले में आरोपी सुरेंद्र कोली को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा बरी किये जाने के खिलाफ दायर सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तीन अप्रैल को सुनवाई करेगा. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने सीबीआई की ओर से दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है. पिछली सुनवाई में सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मामला बहुत गंभीर हत्याओं के है.
दो आरोपीयों को सुनाई गई थी मौत की सजा
बारह मामलों में कोली और दो मामलों में पंढेर को सुनाई गई मौत की सजा को पलटते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर मामले के तय मानदंडों पर उचित संदेह से परे दोनों आरोपियों का अपराध साबित करने में विफल रहा है. बता दें कि साल 2005 से 2006 में नोएडा में हुए निठारी केस में सीबीआई ने सुरेंद्र कोली को हत्या, अपहरण, बलात्कार और सबूत मिटाने के मामले में आरोपी बनाया था, जबकि मनिंदर सिंह पंढेर को मानव तस्करी का भी आरोपी बनाया गया था.
आरोपियों ने अपनी फांसी की सजा को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
दोनों आरोपियों ने अपनी फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. आरोपियों ने कोर्ट में कहा था कि इन घटनाओं का कोई चश्मदीद मौजूद नहीं है. उन्हें सिर्फ वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर ये सजा सुनाई गई है. गौरतलब है कि 7 मई 2006 को निठारी की एक युवती को पंढेर ने नौकरी दिलाने के बहाने बुलाया था. इसके बाद युवती वापस घर नहीं लौटी.
युवती के पिता ने थाने में दर्ज कराया गुमशुदगी का केस
युवती के पिता ने नोएडा के सेक्टर 20 थाने में गुमशुदगी का केस दर्ज कराया था. इसके बाद 29 दिसंबर 2006 को निठारी में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे नाले में पुलिस को 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे. पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था. बाद में निठारी कांड से संबंधित सभी मामले सीबीआई को स्थानांतरित कर दिए गए थे.
-भारत एक्सप्रेस
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