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अरुणाचल में ठेकों की राजनीति? कोर्ट में आमने-सामने सरकार और याचिकाकर्ता

सुप्रीम कोर्ट ने पेमा खांडू पर लगे गंभीर आरोपों एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. याचिका में आरोप है कि मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगियों की कंपनियों को सरकारी ठेके अनियमित तरीके से दिए गए. केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों से प्रत्यक्ष रिपोर्ट आवश्यक है.

Pema Khandu image

सुप्रीम कोर्ट में पेमा खांडू के खिलाफ दायर याचिका में आरोप है कि उनके करीबी रिश्तेदारों और पत्नी से जुड़ी कंपनियों को सैकड़ों करोड़ के सरकारी अनुबंध नियमों की अनदेखी कर दिए गए. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया, जबकि राज्य सरकार ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया. कोर्ट ने सीएजी रिपोर्ट को पर्याप्त न मानते हुए मंत्रालयों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और अब अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा है.चलिए जानते है पूरा मामला:

रिश्तेदारों को मिले ठेकों की एसआईटी जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर लगे गंभीर आरोपों की एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने सभी पक्षों से 2 हफ्ते में लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. दायर याचिका में रिश्तेदारों को मिले ठेकों की एसआईटी जांच की मांग की गई है.

इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि उन्हें यह जानना जरूरी है कि किन कंपनियों को ठेके दिए गए, टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं और इनके पीछे कौन लोग हैं.

मंत्रालयों से प्रत्यक्ष रिपोर्ट पर कोर्ट का जोर

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया था कि मार्च 2025 में ही केंद्र सरकार, खासतौर पर गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्दश दिया गया था. कोर्ट ने कहा था कि सीएजी रिपोर्ट पर्याप्त नहीं है. हमें मंत्रालयों की सीधी रिपोर्ट चाहिए. मामला साफ होना चाहिए कि किन्हें ठेके दिए गए और प्रक्रिया क्या अपनाई गई. सुप्रीम कोर्ट ने खांडू के रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली कंपनियों को सार्वजनिक अनुबंधों के कथित अनियमित आवंटन की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था.

जबकि, पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि हालात चौकाने वाले है. राज्य को एक प्राइवेट कंपनी की तरह चलाया जा रहा है. सभी ठेके उनकी पत्नी की कंपनी, उनके चचेरे भाई की कंपनी आदि को दिए गए हैं. वही अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा था कि याचिका प्रक्रिया का दुरुपयोग मात्र है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीएजी जांच का आदेश दिया था. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौप दिया है. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अरुणाचल प्रदेश वह सब कुछ कर रहा है जो कर सकता है, और यह कानून के तहत है.

सैकड़ों करोड़ के 70 अनुबंधों का दावा

यह भी कहा गया कि यह याचिका राजनीति से प्रेरित है. याचिकाकर्ता कुछ लोगों का समूह है, जो राज्य में विकास नही चाहते है. भूषण ने कहा था कि सैकड़ों करोड़ का मामला है. कोर्ट ने भूषण से पूछा था कि कितने अनुबंध है, जिसपर भूषण ने कहा था कि अपनी पत्नी की कंपनियों को सैकड़ों करोड़ के 70 अनुबंध है. पेमा खांडू के करीबी सहयोगियों को चाबी निविदाएं देने में कथित पक्षपात किया गया, जिसमें खांडू की पत्नी से संबंधित निर्माण कंपनी मेसर्स ब्रांड ईगल्स भी शामिल है.

इसके अलावे पेमा के भतीजे श्री त्सेरिंग ताशी, जो तवांग जिले के विधायक हैं और मैसर्स एलायंस ट्रेडिंग कंपनी के मालिक है, उनकों उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्य संविदा प्रदान की गई है.

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-भारत एक्सप्रेस

Edited By: Shubhra Rai (Intern)

 

 



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