जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 12 अगस्त को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान इंजीनियर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कोर्ट को बताया कि जुर्माने के कारण संसद में अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नही कर पा रहे है.
दायर याचिका में राशिद ने 25 मार्च को एक समन्वयन पीठ के आदेश में संशोधन की मांग की गई है. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी के पीठ ने कहा कि जब हिरासत पैरोल दी जाती है, तो यह आमतौर पर व्यक्ति की लागत पर होती है. राशिद इंजीनियर ने संसद सत्र में भाग लेने के लिए यात्रा खर्च का भुगतान करने के निर्देश देने वाले आदेश को चुनौती दी है.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हम इसे अनुचित और अन्यायपूर्ण इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि राशिद एक निर्वाचित सांसद है. हरिहरन ने कहा कि जब मैंने (राशिद) शपथ ली थी, तब राज्य ने मुझसे कभी खर्च के बारे में नहीं पूछा. ये शर्ते इसलिए लगाई जा रही हैं ताकि मेरे निर्वाचन क्षेत्र की आवाज न सुनी जाए. एक आधिकारिक कर्तव्य है जो हमें सौंपा गया है.
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आतंकी फंडिंग केस में 2019 से जेल में हैं राशिद इंजीनियर
अगली सुनवाई में राशिद के वकील हरिहरन यह तर्क देंगे कि क्या सुरेश कलमाडी के फैसले के आलोक में राशिद को संसद में उपस्थित होने का अधिकार दिया जा सकता है, और यह भी कि क्या याचिका संशोधन या समीक्षा के रूप में विचारणीय है.
पटियाला हाउस कोर्ट ने राशिद इंजीनियर को 24 जुलाई से चार अगस्त के लिए कस्टडी पैरोल दे दिया था. राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था. राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है.
वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है.
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-भारत एक्सप्रेस
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