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1984 सिख विरोधी दंगे के मामले में पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से झटका; नहीं मिली अंतरिम जमानत

1984 सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली है. सीबीआई ने उनकी जमानत का कड़ा विरोध किया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी.

1984 Riots SC Refuses Interim Relief to Sajjan Kumar Hearing in July
Edited by Vaibhav Gupta

1984 सिख विरोधी दंगे (1984 Anti Sikh Riots) 9 के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट सज्जन कुमार की ओर से दायर जमानत याचिका पर जुलाई में सुनवाई करेगा.

सज्जन कुमार के जमानत पर CBI का सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि पिछले सात साल और चार महीने से जेल में है और उनकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार है और चलने फिरने में असमर्थ है. लेकिन वो उनसे एक बार भी नहीं मिल पाए हैं.

वहीं, पिछली सुनवाई में सज्जन कुमार की ओर से दायर जमानत याचिका का सीबीआई (CBI) ने विरोध किया था. कोर्ट ने CBI से पूछा था कि अगर सज्जन कुमार को जमानत देते है, तो क्या सज्जन कुमार परेशानी का सबब बनेंगे. जिसपर सीबीआई ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि सर्च के दौरान भीड़ ने सीबीआई का विरोध किया. भीड़ तभी हटी जब सज्जन कुमार को जमानत मिली.

मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं: सज्जन कुमार

सज्जन कुमार को जनवरी में राऊज एवेन्यु कोर्ट ने जनकपुरी -विकासपुरी मामले में बरी कर दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार ने अपने आप को निर्दोष बताया था. साथ ही अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि मैं निर्दोष हूं और मैं कभी इस अपराध में शामिल नहीं था. उन्होंने कहा था कि इस अपराध से संबंधित एजेंसी के पास मेरे खिलाफ कोई सबूत मौजूद नहीं है. उन्होंने एजेंसी पर निष्पक्ष जांच नहीं करने का भी आरोप लगाया. सज्जन कुमार ने कहा था कि वो उस समय सांसद थे, उनका कोई भी नाम ले सकता था. सज्जन कुमार ने मामले में गवाह हरविंदर सिंह से पूछताछ नहीं करने का भी आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि शुरू में मेरा नाम नहीं लिया गया. दशकों बाद मेरा नाम लिया गया.

क्या था मामला?

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सिख विरोधी दंगा से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि परिस्थिति जन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को अगर ध्यान से देखे तो साफ पता चलता है कि कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ने अपनी भूमिका का निर्वाह नहीं किया था. वो हिंसा पर उतारू भीड़ को समझा बुझा सकते थे.

कोर्ट ने अपनी इस टिप्पणी के साथ निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को पलते हुए उम्रकैद की सजा सुनाया था. बता दें कि दिल्ली कैंटोनमेंट के राज नगर इलाके में एक दो नवंबर 1984 को पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारा में आग लगाए जाने के मामले में दोषी करार दिया था. 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे हुए थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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