राजस्थान के अजमेर स्थित ऐतिहासिक आनासागर झील के संरक्षण से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने राजस्थान सरकार के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें झील के आसपास लगभग 22 हेक्टेयर क्षेत्र में दो वेटलैंड (आर्द्रभूमि) विकसित करने की योजना प्रस्तुत की गई थी.
जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने नगर निगम द्वारा नियुक्त संस्था NEERI (नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए यह मंजूरी दी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि आनासागर झील की परिधि में पाथवे (पैदल पथ) बनाए जाने की आवश्यकता है.
कोर्ट ने लगाई फटकार
हालांकि, इस मामले में पहले कोर्ट ने राज्य सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणियां की थीं. कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. कोर्ट ने साफ कहा था कि उसे आदेशों का अनुपालन चाहिए, बहाने नहीं.
मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कोर्ट ने अधिकारियों पर अदालत को गुमराह करने का आरोप भी लगाया. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि “अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कौन होती है इस अदालत को आदेश देने वाली?” कोर्ट ने सवाल उठाया था कि एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के 21 दिसंबर 2022 के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद झील के आसपास फुटपाथ और अन्य निर्माण कार्य कैसे हो सकते हैं?
कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार आनासागर झील की सुरक्षा को लेकर टालमटोल कर रही है और अगर यही रवैया जारी रहा, तो अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी.
राज्य सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल शिव मंगल सिंह ने अदालत को जानकारी दी कि झील के आसपास हुए अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. इस पर कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि इसकी रिपोर्ट कहां है और सेवन वंडर्स पार्क के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आनासागर झील जैसे ऐतिहासिक जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण और प्राकृतिक धरोहरों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


