सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट्स में जमानत याचिकाओं पर बहुत लंबी तारीख देने की आदत पर गहरी चिंता जताई है. कोर्ट ने साफ कहा कि व्यक्ति की आजादी से जुड़े मामलों को इस तरह टालना बिल्कुल ठीक नहीं है. यह बहुत बड़ी चिंता की बात है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह बात कही.
चार सप्ताह में सभी हाईकोर्ट्स से रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट्स के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया है कि चार हफ्तों के अंदर अग्रिम जमानत, नियमित जमानत और सजा निलंबन से जुड़े मामलों का पूरा ब्यौरा दें. खासकर 1 जनवरी 2025 के बाद दाखिल हुई हर जमानत याचिका का विवरण चाहिए. इसमें याचिका कब दाखिल हुई, अगर फैसला हो गया तो कब हुआ और अगली सुनवाई कब है – यह सब जानकारी देनी होगी.
सनी की याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी
यह आदेश सनी नाम के एक शख्स की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट्स पर केसों का बोझ बहुत है, यह समझ में आता है. लेकिन आजादी से जुड़े मामलों को सबसे पहले सुनना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि जमानत याचिकाओं के साथ जो व्यवहार हो रहा है, उसे देखकर बहुत निराशा हुई है. किसी भी व्यक्ति की जमानत का फैसला उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा मुद्दा होता है.
पटना हाईकोर्ट पर खास निशाना
कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट का नाम लेकर कहा कि वहां जमानत याचिकाएं महीनों तक पहले सुनवाई के लिए भी लिस्ट नहीं होतीं. यह बहुत परेशान करने वाली बात है. कई हाईकोर्ट्स में जमानत मामलों को तुरंत सुनवाई के लिए नहीं रखा जा रहा. इससे लोग जेल में लंबे समय तक रहते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता कि उनकी अर्जी कब सुनी जाएगी.
बेंच बढ़ाने और दिशानिर्देश जारी करने का संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोस्टर बनाना मुख्य न्यायाधीश का काम है. लेकिन जरूरत पड़ने पर जमानत मामलों के लिए अलग से ज्यादा बेंच बनाई जा सकती हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस समस्या पर जरूरी दिशानिर्देश जारी करने के लिए मजबूर है. यह कदम लाखों कैदियों के लिए राहत ला सकता है.
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