सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा मामले में आरोपी तस्लीम अहमद और अब्दुल खालिद सैफी 6 माह के लिए अंतरिम जमानत दे दिया है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है. क्या आतंकवाद विरोधी सख्त कानून यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में मुकदमे की लंबी देरी को आरोपी जमानत का आधार बनाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर गंभीर सवाल उठाए है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट के सामने एक तीखा सवाल रखा.
उन्होंने कहा कि केवल मुकदमे में देरी या लंबे समय से जेल में होने को यूएपीए के तहत जमानत पाने का ब्लैंकेट फॉर्मूला नही माना जा सकता. एएसजी राजू ने 2008 के.मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब और पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद का उदाहरण देते हुए कहा कि कसाब के मामले में गवाहों की भारी संख्या के कारण मुकदमा सात साल तक खींच गया था. तो क्या इसका मतलब यह है कि कोर्ट कसाब को जमानत दे देता? अगर हाफिज सईद को भारत लाया जाए, तो उसके मामले में भी बड़ी संख्या में गवाह होंगे और मुकदमे में देरी होगी तो क्या उसे भी कोर्ट जमानत पर रिहा कर देगा?
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से लंबी हिरासत पर मांगा जवाब
पिछली सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा की जमनात कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों को पांच साल हो चुके है? किसी आरोपी को कितने साल तक जेल में रखा जा सकता है? अदालत ने आरोपित की तरह से मुकदमे में देरी के आधार पर दलीलें दिए जाने के बाद यह सवाल पूछा था. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले में शामिल कई आरोपियों को देरी के आधार पर वर्ष 2021 में जमानत मिल चुकी है. जिनमें सह-आरोपी देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा और नताशा नरवाल शामिल है. उन्होंने कहा था कि तस्लीम अहमद पिछले पांच साल से जेल में बंद है.
24 जून 2020 को उसे गिरफ्तार किया गया था. ट्रायल खत्म होने की संभावना फिलहाल नही दिख रही है.
इस मामले में 700 गवाह है, लिहाजा जमानत दे दिया जाए. उन्होंने कहा था अहमद के मुकदमें अन्य आरोपियों से अलग है. उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले साल से अब तक पांच सह-आरोपियों ने आरोप पर दलीलें पूरी की हैं. तस्लीम अहमद, अब्दुल खालिद सैफी, शरजील इमाम, उमर खालिद, ताहिर हुसैन और अन्य के साथ 2020 के दिल्ली हिंसा के मामले की एक बड़ी साजिश में आरोपी हैं.
इससे पहले उनकी नियमित जमानत याचिका को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 22 फरवरी 2024 को खारिज कर दिया था. जिसमें उन्होंने सह-आरोपियों नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा के साथ समानता के आधार पर जमानत मांगी थी. लेकिन कोर्ट ने अहमद की ओर से दी गई सभी दलीलों को दरकिनार करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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