सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर मामले में 12वें दस्तवेज़ों के तौर पर शामिल आधार को हटाने की मांग वाली याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट याचिककर्ताओ की ओर से उठाए गए आपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट 7 अक्टूबर को सुनवाई करेगा.
याचिककर्ताओ का आरोप है कि चुनाव आयोग पारदर्शिता और नियमों का अनुपालन नहीं कर रहा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी से पूछा कि वर्तमान स्थिति क्या है? क्या हमें वास्तविक आकलन का इंतजार नहीं करना चाहिए कि कितने लोग छूट गए हैं?
आयोग को भी कानूनी तौर पर सुना जाए
वही याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि जहां तक अन्य राज्यों का सवाल है, चुनाव आयोग आगे बढ़ रहा है. बस हमें एक तारीख बताइए जिस दिन कानूनी मुद्दे पर सुनवाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया संवैधानिक व्यवस्था में गड़बड़ी पाई जाती है, तो हम इस प्रक्रिया को जारी न रखने पर जोर दे सकते है. आयोग को भी कानूनी तौर पर सुना जाना चाहिए.
अभी तक 7.89 करोड़ मतदाता शुरू में मौजूद थे. 4.96 करोड़ मतदाता स्वतः ही ड्राफ्ट रोल में शामिल हो गए. अनुमान है कि 6.84 करोड़ मतदाता आधार कार्ड धारक है. वही वृंदा ग्रोवर ने कहा कि 22 नवंबर तक बिहार विधानसभा का गठन हो जाना चाहिए. यह नियमावली कानून के अनुरूप नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हम सितंबर के अंत तक मतदान कराने का अनुरोध करते है. उन्होंने पूरे देश में इसकी घोषणा कर दी है. इस मामले में जो मिसाल है, उसका पालन अन्य जगहों पर भी किया जाना चाहिए.
बिहार के तर्ज पर SIR कराने का फैसला
हालही में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया है कि देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिहार के तर्ज पर एसआईआर कराने का फैसला लिया है. आयोग की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि उसके पास मतदाता सूची में संशोधन की नीति का पूरा अधिकार है. चुनाव आयोग ने दायर हलफनामे में उपाध्याय की ओर से दायर याचिका को खारिज करने की मांग की है.
आयोग ने कहा है कि इस प्रकिया के लिए अदालतें निर्देश नही दे सकती, क्योंकि यह उसके अधिकार क्षेत्र में आता है. अगर अदालत ऐसा निर्देश देती है कि ये निर्वाचन आयोग के संवैधानिक क्षेत्राधिकार में अतिक्रमण के समान होगा. देशभर में एसआईआर के लिए एक जनवरी 2026 की तारीख को आधार माना गया है, उसी आधार पर तैयारियां भी चल रही हैं.
बता दें कि वर्ष 2026 में असम, केरल, पुड्डुचेरी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने वाला है. इससे पहले आयोग इन एसाईआर राज्यों में एसआईआर कराएगा.
इसको लेकर आयोग के 10 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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