Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को दो हफ्ते की मोहलत

पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और FSSAI को 2 हफ्ते का समय दिया है. कोर्ट ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में कॉरपोरेट दबाव नहीं चलेगा.

Supreme Court
Edited by Vaibhav Gupta

पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर चेतावनी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने इसको लेकर केंद्र सरकार और FSSAI को 2 सप्ताह का समय दिया है.

कोर्ट ने सरकार को उच्च मात्रा में चीनी, नमक और संतृप्त वसा वाले पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर सामने की तरफ चेतावनी लेबल लगाने का निर्देश दिया है.

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल नियमों का नही, बल्कि करोड़ो लोगों के स्वास्थ्य, विशेष रूप से बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है.

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार और FSSAI से पूछा कि अभी तक इस दिशा में कदम क्यों नहीं उठाया गया है. कोर्ट इसको लेकर अगली सुनवाई में फैसला सुना सकता है.

कोर्ट ने कहा कि यह मामला सीधे देश के नागरिकों, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है. ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर कॉरपोरेट दबाव को फैसलों पर हावी नहीं होने दिया जा सकता.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से FSSAI की सात मार्च की बैठक के मिनट्स का हवाला दिया गया. आरोप लगाया गया कि FSSAI का रुख अदालत के पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं है.

चेतावनी लेबल लगाने का विरोध

FSSAI ने अपने पक्ष में बताया कि खाद्य उद्योग पैकेजिंग पर चेतावनी लेबल लगाने का विरोध कर रहा है. कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में पूछा कि क्या सरकार खुद यह कदम उठाएगी या अदालत को आदेश जारी करना पड़ेगा? कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार ऐसा नहीं कर सकती तो अदालत खुद आदेश पारित करेगी.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि भारत मे पारंपरिक खाद्य पदार्थो, जैसे नमकीन, पर प्रस्तावित चेतावनी व्यवस्था लागू करने से कई उत्पादों पर लाल निशान आ सकता है.

सरकार ने यह भी कहा कि विकसित देशों में खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और वसा की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए उन्हीं मानकों को भारतीय पारंपरिक खाद्य पदार्थों पर सीधे लागू करना उचित नहीं होगा.

चेतावनी लेबल पर अदालत ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की सभी दलीलों को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ऐसी चिंताएं उपभोक्ताओं को उनके भोजन के पोषण संबंधी जोखिमों के बारे में जागरूक करने में बाधा नहीं बन सकती.

अदालत ने कहा कि उपभोक्ता पहले से जानते है कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थो में चीनी वसा और कार्बोहाइड्रेट होते है. लेकिन फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल उन्हें उत्पाद खरीदने से पहले उसके पोषण संबंधी जोखिमों की सरल और स्पष्ट जानकारी देंगे.

कोर्ट सरकार की उस दलीलों को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि ऐसे लेबल से निर्माताओं के कारोबार पर असर पड़ेगा. कोर्ट ने कहा कि उत्पाद खरीदने का अंतिम निर्णय उपभोक्ता का ही रहेगा.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा डीजीपी नियुक्ति को लेकर यूपीएससी की बैठक पर लगाई रोक, 18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital