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Delhi Riots 2020 Case: शरजील इमाम और उमर खालिद जेल में ही रहेंगे या बाहर निकलेंगे? सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी को सुनाएगा फैसला

Sharjeel Imam Umar Khalid Case: दिल्ली दंगे-यूएपीए के मामलों में पकड़े गए उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा आदि आरोपियों को राहत नहीं मिल रही. अब सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी को इनकी जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा.

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Delhi Riots UAPA Case: सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी 2026 को दिल्ली दंगे की बड़ी साजिश के मामले में जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा. यह फैसला छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम, उमर खालिद, गुलफिशा फातिमा और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर होगा. ये सभी आरोपी यूएपीए कानून के तहत जेल में बंद हैं. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है.

अब तक सुनवाई में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को 18 दिसंबर तक अपनी दलीलें supporting दस्तावेज जमा करने को कहा था. दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि शरजील इमाम के भाषणों को अन्य आरोपियों के खिलाफ भी सबूत माना जा सकता है. पुलिस ने कहा कि इन भाषणों से उकसावा मिलता है. कोर्ट ने पूछा कि क्या सिर्फ भाषणों को यूएपीए के तहत आतंकी कृत्य माना जा सकता है.

आरोपियों की दलीलें

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि सिर्फ भाषण देने से आतंकवाद का आरोप नहीं लगाया जा सकता. शरजील इमाम के वकील सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट में कहा कि मैं आतंकवादी नहीं हूं, न राष्ट्र विरोधी हूं, लेकिन पुलिस और राज्य ने मुझे ऐसा कहा है. उमर खालिद के वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि दंगे के समय खालिद दिल्ली में नहीं थे. वे एक शोध छात्र हैं, सरकार को उखाड़ फेंकने की ताकत उनमें नहीं है. किसी के भाषण को जोड़कर दंगों का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

दिल्ली पुलिस का पक्ष

दिल्ली पुलिस के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि 2020 के दंगों में 53 लोग मारे गए और 530 से ज्यादा घायल हुए. हिंसा में पेट्रोल बम, पत्थरबाजी और तेजाब का इस्तेमाल हुआ. पुलिसकर्मियों पर भी हमले हुए. पुलिस ने शरजील इमाम के वीडियो क्लिप दिखाए, जिसमें वे सड़क बंद करने और दिल्ली में दूध-पानी बंद करने की बात कह रहे हैं. ये बयान सीएए विरोध प्रदर्शनों के समय के हैं. आरोपी पांच साल से ज्यादा समय से जेल में हैं.



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