सुप्रीम कोर्ट ने देश के उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली पेंशन व अन्य सुविधाओं में राज्यों के बीच भारी असमानता पर गहरी चिंता जताई है. अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि यात्रा के दौरान ड्राइवर, सुरक्षा और सरकारी अतिथि गृहों में ठहरने जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने पर विचार किया जाए.
कोर्ट ने सुझाव दिया है कि इस नीति को तैयार करने के लिए गठित समिति की अध्यक्षता किसी पूर्व हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जानी चाहिए.
केंद्र बनाएगा समिति
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता व एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के तहत केंद्र ने एक समिति बनाने का फैसला लिया है, जिसका प्रमुख एक पूर्व सचिव स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया गया है. इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस समिति की अध्यक्षता किसी रिटायर्ड हाई कोर्ट चीफ जस्टिस को करनी चाहिए. शीर्ष अदालत के इस सुझाव पर केंद्र सरकार को 28 सितंबर तक अपना रुख साफ करते हुए जवाब दाखिल करना है.
45-50 हजार में ड्राइवर और सुरक्षाकर्मी कैसे मिलेंगे?: CJI
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने राज्यों द्वारा दी जा रही वित्तीय मदद की पर्याप्तता पर कड़ा सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि केवल 45 से 50 हजार रुपये की सीमित राशि में कोई पूर्व जज किसी ड्राइवर और सुरक्षा अधिकारी की व्यवस्था कैसे कर सकता है? कोर्ट ने कहा कि घरेलू सहायकों, टेलीफोन, मेडिकल खर्च और यात्रा सुविधाओं के नियम राज्यों में अलग-अलग हैं, जिससे कई पूर्व जजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
राज्यों में एकरूपता की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यों के बीच इस मामले में कोई एकरूपता नहीं है. कोर्ट ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार एक पैनल गठित कर इन सुविधाओं के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार करे और यदि राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ता है, तो जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार इसमें अपने अनुदान के जरिए आर्थिक योगदान भी दे सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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