थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीया जलाने के मामले में मद्रास हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. मद्रास हाईकोर्ट ने थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर एक दरगाह के पास पत्थर के खंभे के ऊपर कार्तिगई दीया जलाने की अनुमति दे दिया था. यह जगह पहाड़ी पर स्थित एक ऐतिहासिक दरगाह से करीब 50 मीटर की दूरी पर है.
कोर्ट ने हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया था कि वह जगह श्री सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर की है. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में वक्फ बोर्ड का कोई कानूनी अधिकार नही है. जिसके बाद राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के 6 जनवरी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है.
मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील
सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने 11 जून को सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है. राज्य सरकार द्वारा दायर कहा गया है कि पहाड़ी पर दीया जलाने वाली जगह के पास एक दरगाह है. वहां दीया जलाने से सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है और कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है. मंदिर प्रबंधन और दरगाह कमेटी की ओर से भी हाई कोर्ट के फैसले को लेकर चिंता जाहिर करते हुए अपील की यही. लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने चिंताओं को काल्पनिक बताते हुए खारिज कर दिया था.
हिंदू संगठनों और स्थानीय श्राद्धालुओ ने विरोध किया था. उनका कहना है कि यह सनातनी हिंदुओ की आस्था और भावनाओं के खिलाफ है. हिंदू धर्म परिषद ने भी इस मामले में याचिका दायर कर थिरुपरनकुंद्रम मंदिर और उससे जुड़े धार्मिक अधिकारों की रक्षा की मांग की है. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर किया गया था.
यह याचिका तमिलनाडु के वकील जी एस मणि ने दायर किया था.
दायर याचिका में कहा गया था कि इस तरह की गतिविधियों से न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुचती है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है. आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने अब तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नही की है.
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भारत एक्सप्रेस
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