Bharat Express DD Free Dish

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं किया पालन, अवमानना की कार्यवाही करते हुए किराएदार को भेजा जेल

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवहेलना करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया है. कोर्ट ने लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन बनाम हर्ष गोयल मामले में यह बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने राजेश गोयल को तीन महीने की सिविल सजा सुनाई है

supreme court
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवहेलना करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया है. कोर्ट ने लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन बनाम हर्ष गोयल मामले में यह बड़ा आदेश दिया है. जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने राजेश गोयल को तीन महीने की सिविल सजा सुनाई है, साथ ही कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

बार-बार आदेशों की हुई अवमानना

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम मानते हैं और अवमानना के दोनों दोषी जानबूझकर और बार-बार कोर्ट के आदेशों की अवहेलना किया है, तथा रिकॉर्ड के विपरीत जाकर बयान दिए है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि दोषी व्यक्ति अगर जुर्माने की राशि नहीं चुकता है तो उसे एक महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी.

कोर्ट के आदेश के बाद कोर्ट में मौजूद सुरक्षकर्मियों ने राजेश गोयल को हिरासत में लेकर तिहाड़ जेल भेज दिया है. वहीं कोर्ट ने इस मामले में शामिल एक अन्य आरोपी हर्ष गोयल को 82 साल की उम्र होने के चलते नरमी बरतते हुए जेल की सजा से राहत दे दी है. लेकिन कोर्ट ने उनपर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे दो महीने में सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में जमा करना होगा. जुर्माना नहीं देने पर एक महीने जेल में रहना होगा.

नए न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति का दिया निर्देश

कोर्ट ने सहारनपुर की एक संपत्ति विवाद के मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने जिला जज सहारनपुर को निर्देश दिया है कि वे एक न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति करें, जो पुलिस की मदद से दो सप्ताह के भीतर कब्जा कर ले. कोर्ट ने कहा कि यदि संपत्ति के भीतर दोषियों का सामान मिलता है कि उसकी सूची तैयार कर सुरक्षित रखा जाए, और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस कर दिया जाए.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि सहारनपुर स्थित बंगला हॉल म्युनिसिपैलिटी नंबर 2/1410/11, रोज बैंक, अहमद बाग/ चंद्रानगर कोर्ट रोड़ की संपत्ति को 31 मार्च 2025 तक खाली करना है.

बाद में कोर्ट ने खाली करने का समय सीमा को 23 सितंबर 2025 तक बढ़ा दिया था. लेकिन किरायेदारों ने इसका पालन नहीं किया. जिसके बाद कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए यह आदेश दिया है.

ये भी पढ़ें:तिरुपति प्रसादम विवाद से जुड़े मामले में सीबीआई निदेशक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read