पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा पूरी चयन प्रक्रिया अवैधताओं के कारण प्रभावित हुई है. पुनर्विचार याचिकाएं विचारणीय नहीं है, क्योंकि सभी प्रासंगिक पहलुओं पर पहले ही व्यापक रूप से विचार किया जा चुका है. पश्चिम बंगाल आयोग द्वारा मूल ओएमआर शीट या कम से कम उनकी प्रतियां सुरक्षित रखने में विफलता एक महत्वपूर्ण कारक था, जिसपर कोलकाता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने विचार किया.
जनता के विश्वास की चिंता जताई
मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा था कि सार्वजनिक नौकरी बहुत कम है. अगर जनता का विश्वास चला गया तो कुछ नही बचेगा. यह व्यवस्थागत धोखाधड़ी है. सरकार नौकरियां बेहद कम है और उन्हें समाजिक गतिशीलता के रूप में देखा जाता है. अगर उनकी नियुक्तियों को भी बदनाम कर दिया जाए तो सिस्टम में क्या रह जाएगा. लोग विश्वास खो देंगे. आप इसे कैसे स्वीकार करेंगे. कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार के पास यह दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है कि डेटा उसके अधिकारियों द्वारा बनाए रखा गया था और इसकी उपलब्धता के बारे में पूछा गया था.
कोर्ट ने राज्य सरकार के वकीलों से कहा था को या तो आपके पास देता है या आपके पास नहीं है. पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने कोलकाता हाइकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पूछा था कि क्या इस तरह के आदेश को कायम रखा जा सकता है. उन्होंने तर्क दिया था कि यह सीबीआई का भी मामला नहीं है कि सभी 25000 नियुक्तियां अवैध है.
वही स्कूल सेवा आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया था कि हाइकोर्ट की पीठ के पास नौकरियां रद्द करने का अधिकार क्षेत्र नही था, और उसके इस मामले में शीर्ष अदालत के फैसलों के विपरीत थे.
ये भी पढ़े: सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा ऑडियो क्लिप मामले में फॉरेंसिक जांच पर उठाए सवाल, 25 अगस्त को अगली सुनवाई
भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



